आध्यात्म में छिपा है अच्छा स्वास्थ्य !

हम किसी भी धर्म के मानने वाले  हों  और   ईश्वर के किसी भी स्वरुप पर आस्था रखते हों, इन सबके मूल में निहित अध्यात्म हमें स्वस्थ रहने की प्रेरणा देता है I

यह बात यूनिवर्सीटी आफ मिसौरी के शोधकर्ताओं  ने अपने शोध से प्रमाणित की है …Iधार्मिक एवं आस्था की कसौटी हमें मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करती है, यह बात सदियों पूर्व आयुर्वेद के मनीषी सुश्रुत ने स्वास्थ्य को परिभाषित करते समय

“सम  दोषः समअग्निः समधातु: मल: क्रियाः प्रसन्नआत्मइन्द्रियः मनः स्वस्थमितिधीयते ….!!

 कहकर स्पष्ट की थी ..I हाल के इस शोध से यह बात और अधिक पुख्ता साबित हुई है कि व्यक्ति की धार्मिक आस्था और विश्वास उसकी पर्सनालिटी के लिए जिम्मेदार होता है I वैज्ञानिक डान कोहेन, एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर,रेलीजीयस स्टडीज,  यूनिवर्सीटी आफ मिसौरी के अनुसार आध्यात्मिक चेतना विकसित होने पर व्यक्ति स्वयं ( मैं) के भाव से दूर होता हुआ विस्तृत एकात्म चिंतन अर्थात ब्रह्माण्ड से अपने जुड़ाव (एकात्मकता ) को महसूस करने लगता है ..I

महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति के अधिक या कम  धार्मिक प्रार्थनाओं और सम्बंधित  कार्यक्रमों में  भागीदार होने या न होने  से   उसकी पर्सनलाटी,आध्यात्मिक चेतना  ,धार्मिक चिंतन  और स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता हैI इस अध्ययन के लिए विभिन्न धर्मावलम्बियों (बुद्धिस्ट,मुस्लिम,प्रोटेस्टेंट,यहूदी,केथोलिक आदि )  को सम्मिलित किया गया I शोध के परिणामों में यह बात साफ़ देखी गयी कि इन सभी  धर्मावलम्बियों में पायी गयी  प्रचुर   आध्यात्मिक चेतना उनके  अच्छे मानसिक स्वास्थ्य से सीधे समबंधित थी I ..इससे पूर्व के शोध में भी यह पाया गया था कि  सकारत्मक आध्यात्मिक चेतना व्यक्ति को विभिन्न घातक अवस्थाओं जैसे: कैंसर,रीढ़ की हड्डी की चोट या दिमागी चोट से उबरने में काफी मददगार होती है .. I अतः किसी भी मजहब,आस्था और विश्वास का मूल इसके अन्दर निहित आध्यात्म है जो हमें मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करने के साथ-साथ गंभीर परिस्थितियों को सरलता से जूझने में मददगार होता है ..!!

(डॉ. नवीन चन्द्र जोशी के ब्लॉग “मेरी भी सुनो ” से …)

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