बधाई संदेश: देवकी नंदन ठाकुर जी

devki nandan thakur ji

दिन ढलता है, रात आती है, और फिर सुबह! कैलेंडर के मास विशेष की एक तारीख और आगे सरक जाती है, फिर अमावस की गिनती के बाद मास पूरा हो जाता है, कैलेंडर का पृष्ठ – सुंदर चित्र हुआ तो पीछे कर दिया जाता है, अनाकर्षक हुआ तो फाड़ दिया जाता है और एक दिन वह पूरा कैलेंडर ही निरर्थक हो जाता है। नए वर्ष के पहले दिन एक दूसरा, नया कैलेंडर उसकी जगह ले लेता है। फिर वही नव संवत्सर , वही पहली तिथि  – बधाइयों की औपचारिकता – कभी-कभी कुछ इस भाव से कि ‘हम भी तो पड़े हैं राहों में!’
पर इस बार कुछ सार्थक सा लग रहा है. जैसे कुछ अच्छा होने जा रहा है. सत्संग लाइव को लेकर मुझे व्यक्तिगत तौर पर बहुत आशाएं है. ये वेबसाईट यूँ ही इंटरनेट पर ढेर सारी वेबसाइटों में दब कर न रहकर कुछ सार्थक करेगी, आशा है.
मनन, चिंतन की सारी सामग्री यहाँ उपलब्ध होगी, जिस से देश का इंटरनेट-युगी युवा को  अपने कंप्यूटर पर कुछ सार्थक पढ़ने-देखने को मिलेगा. समाज को नयी दिशा मिलेगी.
बिहारी जी का आशीर्वाद आपके साथ रहे,
देवकी नंदन ठाकुर
(शांति दूत श्री देवकी नंदन ठाकुर जी महाराज , मथुरा)

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