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ll Pics ll बद्रीनाथ धाम

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रविवार सुबह पूरे पारंपरिक विधि विधान के साथ बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए हैं. जैसे ही बद्रीनाथ के कपाट खुले पूरा क्षेत्र बद्रीनाथ के जयकारों से गूंज उठा.

अब छह महीने तक श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम जाकर भगवान विष्णु के दरबार में मत्था टेक सकेंगे.

देवप्रयाग

देवप्रयाग, जहाँ अलकनंदा और भागीरथी का संगम होता है.

अलकनंदा नदी के किनारे स्थित बद्रीनाथ धाम देश के चार धामों में से एक है. मंदिर में नर नारायण विग्रह की पूजा होदी है और अखंड दीप जलता रहता है जो कि ज्ञान ज्योति का प्रतीक है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई तो वह 12 धाराओें में बंट गई. इस स्थान पर मौजूद धारा अलकनंदा के नाम से विख्यात हुई और ये स्थान बद्रीनाथ, भगवान विष्णु का वास बना.

हिंदू धर्म की प्राचीन मान्यताओं में इसे स्वर्ग के द्वार की संज्ञा दी गई है. प्राचीन धार्मिक मान्यताएं तो यहां तक कहती हैं कि भगवान विष्णु आज भी यहां निवास करते हैं.

माना जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी के दौरान इस मंदिर का निर्माण कराया था. बद्रीनाथ धाम में बद्रीविशाल के दाहिनी ओर कुबेर जी की मूर्ति है.

इसके अलावा उद्धव जी और उत्सव जी की मूर्ति विराजमान है. इसी उत्सव मूर्ति को शीतकाल के छह महीनों में जब बद्रीनाथ के कपाट बंद होते हैं तो जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में लाया जाता है और शीतकाल के छह महीनों में यहीं पर उत्सव मूर्ति की पूजा अर्चना होती है.

इस बार श्रद्धालुओं को यहां घंटों लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ेगा.

इस बार से यहां टोकन सिस्टम की शुरुआत की जा रही है. इस सिस्टम के तहत टोकन में यात्रियों को भगवान के दर्शन का समय लिखा होगा.

बद्रीनाथ के कपाट छह महीने के लिए ही खुलते हैं और छह महीने के लिए बंद कर दिए जाते हैं.

पहाड़ी रास्ते

जोशीमठ पार करने के बाद कुछ ऐसे रास्तों से दो-चार होना होता है

जोशीमठ पार करने के बाद कुछ ऐसे रास्तों से दो-चार होना होता है

नर पर्वत, बद्री विशाल

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बद्री विशाल मंदिर

बद्री विशाल मंदिर

बद्री विशाल मंदिर

बद्री विशाल मंदिर

बद्री विशाल मंदिर

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