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इंसान को बुल्‍ले शाह की सीख

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इंसान को बुल्‍ले शाह की सीख

बुल्‍ला की काफियां और कलमे पढ़कर लगता है कि वह खुदा को बहुत करीब से जान गए थे. वे एक नेकदिल इंसान थे. उसकी कुछ पंक्तियां मैं यहां प्रस्‍तुत कर रहा हूं. आशा करता हूं कि इन दिनों जो कटुता अल्‍लाह और भगवान के नाम पर फैलाई जा रही है, ये पंक्तियां ऐसी कटुता फैलाने वालों को आईना दिखाएंगी-

इंसान की पहचान इंसानियत
”चल वे बुल्‍लेआ चल ओथे चल्लिए
जित्‍थे सारे अन्‍नेह
ना कोई साडी जात पछाणे
ते ना कोई सानू मन्‍ने”

मतलब- बुल्‍ले शाह ने खुद से कहा है कि ऐ बुल्‍ले चल हम वहां चलते हैं जहां सभी अंधे लोग बसते हों. ताकि ऐसी जगह पर हमें कोई पहचान न सके और न ही कोई हमें माने.

इन पंक्तियों से अगर धर्मांध लोगों का अज्ञान दूर नहीं होता तो ये देखिए-
मस्जिद ढा दे, मंदिर ढा दे
ढा दे जो कुज्‍ह दिसदा
पर किसे दा दिल ना ढावीं
रब दिल्‍लां विच वसदा

मतलब- बुल्‍ले शाह ने भगवान या अल्‍लाह के दिलों में बसने की बात कही है. वे कहते हैं कि मंदिरों और मस्जिदों में कुछ नहीं है. उसे बेशक तुम लोग गिरा दो. उसके अलावा भी जो कुछ नजर आता है उसे भी गिरा दो; लेकिन किसी का दिल ना तोड़ना, क्‍योंकि रब या अल्‍लाह या भगवान तो दिलों में बसता है.

उनकी एक क़ाफी देखें-
पढ़ पढ़ आमिल फाजिल होया
कदी अपणे आप नूं पढेआ ही नहीं
जा जा वड़दा मंदिर मसीतां
कदी मन अपने विच तूं वड़ेआ ही नहीं
ऐवें रोज शैतान दे नाल लड़दा
कदी नफ्ज़ अपने नाल लड़ेआ ई नहीं
बुल्‍ले शाह आसमानीं उडीया फड़दा
जेहड़ा घर बैठा ओहनू फड़ेआ ही नहीं

मतलब- किताबें पढ़-पढ़ कर तुम बहुत विद्वान हो गए हो, कभी अपने आप को तो पढ़ा ही नहीं. तुम बार-बार मंदिरों में मस्जिदों में जाते हो, पर कभी अपने खुद के अंदर नहीं घुसे. कहने तो तुम रोज शैतान से लड़ते हो, कभी खुद के अहंकार से तो लड़े ही नहीं. यहां अहंकार का अर्थ जो पढ़ लिया, जान लिया वही सही है उसके सिवाय न तो कुछ सही है और न सही हो सकता. हे बुल्‍ले शाह तू आसमान की चीजों की बात करता है, क्‍या कभी तून उसकी बात की, जो तेरे अंदर बैठा है. मतलब उस खुदा को तो तूने पकड़ा ही नहीं, जो तुम्‍हारे भीतर है.
ABOUT BULLEH SHAH:
Mir Bulleh Shah Qadiri Shatari, often referred to simply as Bulleh Shah (a shortened form of Abdullah Shah) lived in what is today Pakistan. His family was very religious and had a long tradition of association with Sufis. Bulleh Shah’s father was especially known for his learning and devotion to God, raising both Bulleh Shah and his sister in a life of prayer and meditation.
Bulleh Shah himself became a respected scholar, but he longed for true inner realization. Against the objections of his peers, he became a disciple of Inayat Shah, a famous master of the Qadiri Sufi lineage, who ultimately guided his student to deep mystical awakening.
The nature of Bulleh Shah’s realization led to such a profound egolessness and non-concern for social convention that it has been the source of many popular comical stories — calling to mind stories of St. Francis or Ramakrishna. For example, one day Bulleh Shah saw a young woman eagerly waiting for her husband to return home. Seeing how, in her anticipation, she braided her hair, Bulleh Shah deeply identified with the devoted way she prepared herself for her beloved. So Bulleh Shah dressed himself as a woman and braided his own hair, before rushing to see his teacher, Inayat Shah.
Bulleh Shah is considered to be one of the greatest mystic poets of the Punjab region.
His tomb in the Qasur region of Pakistan is greatly revered today.
लेखक: मलखान सिंह malkhan singh

लेखक को जानें….
प्रिंट मीडिया से मीडिया में कदम रखा. चार साल तक डेस्क पर काम किया. पंजाब केसरी, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान से बहुत-कुछ सीखा. किन्हीं कारणों से प्रिंट लाइन से दूर होना पड़ा. आजकल वेब मीडिया और मोबाइल वैस के लिए काम कर रहा हूं. लिखना मेरी जिंदगी है, राजनीति पर व्यंग्य लिखने का प्रयास करता हूं. कभी सफल तो कभी असफल. यहां भी इसी उद्देश्य से पहुंचा हूं.

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