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नवरात्रि: आज दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा

नवदुर्गाओं में दूसरी दुर्गा का नाम ब्रहमचारिणी है। इनकी पूजा द्वितीया तिथि को की जाती है। ब्रहमचारिणी इस लोक के समस्त चर और अचर जगत की विद्याओं की ज्ञाता हैं। इनका स्वरूप श्वेत वस्त्र में लिपटी हुई कन्या के रूप में है जिनके एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे हाथ में कमंडल है। यह [...]

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श्री राम स्तुति

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं | नवकंज-लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं || कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद-सुन्दरं | पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं || भजु दीनबंधु दिनेश दानव- दैत्यवंश-निकंदनं | रघुनंद आंनदकंद कोशलचंद दशरथ-नंदनं || सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभुषणं | आजानु भुज शर चाप धर, [...]

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साधन पंचकम् – (भावार्थ सहित )

वेदो नित्यमधीयताम्, तदुदितं कर्म स्वनुष्ठीयतां, तेनेशस्य विधीयतामपचितिकाम्ये मतिस्त्यज्यताम्। पापौघः परिधूयतां भवसुखे दोषोsनुसंधीयतां, आत्मेच्छा व्यवसीयतां निज गृहात्तूर्णं विनिर्गम्यताम्॥ (१) भावार्थ : वेदों का नियमित अध्ययन करें, उनमें कहे गए कर्मों का पालन करें, उस परम प्रभु के नियमों का पालन करें, व्यर्थ के कर्मों में बुद्धि को न लगायें। समग्र पापों को जला दें, इस संसार [...]

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॥ यमुनाष्टकम् ॥

(१) नमामि यमुनामहं सकल सिद्धि हेतुं मुदा, मुरारि पद पंकज स्फ़ुरदमन्द रेणुत्कटाम। तटस्थ नव कानन प्रकटमोद पुष्पाम्बुना, सुरासुरसुपूजित स्मरपितुः श्रियं बिभ्रतीम॥ (२) कलिन्द गिरि मस्तके पतदमन्दपूरोज्ज्वला, विलासगमनोल्लसत्प्रकटगण्ड्शैलोन्न्ता। सघोषगति दन्तुरा समधिरूढदोलोत्तमा, मुकुन्दरतिवर्द्धिनी जयति पद्मबन्धोः सुता॥ (३) भुवं भुवनपावनीमधिगतामनेकस्वनैः, प्रियाभिरिव सेवितां शुकमयूरहंसादिभिः। तरंगभुजकंकण प्रकटमुक्तिकावाकुका, नितन्बतटसुन्दरीं नमत कृष्ण्तुर्यप्रियाम॥ (४) अनन्तगुण भूषिते शिवविरंचिदेवस्तुते, घनाघननिभे सदा ध्रुवपराशराभीष्टदे। विशुद्ध मथुरातटे सकलगोपगोपीवृते, [...]

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॥ रुद्राष्टकम् ॥ (भावार्थ सहित )

  नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।   RELATED ARTICLES एक ज्योतिर्लिंग ऐसा जहाँ शिव लिंग दिखाई नहीं देता अमरनाथ यात्रा 2012: रजिस्ट्रेशन आरम्भ केदार नाथ का सफर 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा उज्जयिनी के राजा: दक्षिण मुखी महाकाल काशी मोक्ष नगरी: विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग ॥ शिव तांडव स्तोत्रम् ॥ ************************************************ नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं। निजं [...]

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॥ श्रीकृष्ण स्तुति ॥

श्री कृष्ण चन्द्र कृपालु भजमन, नन्द नन्दन सुन्दरम्। अशरण शरण भव भय हरण, आनन्द घन राधा वरम्॥ सिर मोर मुकुट विचित्र मणिमय, मकर कुण्डल धारिणम्। मुख चन्द्र द्विति नख चन्द्र द्विति, पुष्पित निकुंजविहारिणम्॥ मुस्कान मुनि मन मोहिनी, चितवन चपल वपु नटवरम्। वन माल ललित कपोल मृदु, अधरन मधुर मुरली धरम्॥ वृषुभान नन्दिनि वामदिशि, शोभित सुभग [...]

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॥ हनुमानाष्टकम् ॥

बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो, ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो। देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो, को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥ (१) भावार्थ : हे हनुमान जी! आप जब बालक थे तब आपने [...]

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॥ हनुमान स्तुति ॥

  ॥ दोहा ॥ निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान । तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान॥ ॥ चौपाई ॥ जय हनुमन्त सन्त हितकारी, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज विलम्ब न कीजै, आतुर दौरि महा सुख दीजै॥ जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा, सुरसा बदन पैठि विस्तारा॥ आगे जाई लंकिनी [...]

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गोपी गीत

कस्तूरी तिलकं ललाट पटले वक्ष: स्थले कौस्तुभं। नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणु: करे कंकणं॥ भावार्थ:- हे श्रीकृष्ण! आपके मस्तक पर कस्तूरी तिलक सुशोभित है। आपके वक्ष पर देदीप्यमान कौस्तुभ मणि विराजित है, आपने नाक में सुंदर मोती पहना हुआ है, आपके हाथ में बांसुरी है और कलाई में आपने कंगन धारण किया हुआ है। सर्वांगे हरि [...]

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अत्रि स्तुति

नमामि भक्त वत्सलं, कृपालु शील कोमलं। भजामि ते पदांबुजं, अकामिनां स्वधामदं॥ (१) भावार्थ : हे प्रभु! आप भक्तों को शरण देने वाले है, आप सभी पर कृपा करने वाले है, आप अत्यंत कोमल स्वभाव वाले है, मैं आपको नमन करता हूँ। हे प्रभु! आप कामना-रहित जीवों को अपना परम-धाम प्रदान करने वाले है, मैं आपके [...]

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