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The Spiritual Touch

Meditation

जैसे ही हम ध्यान में गिरते है, जैसे हमारी चेतना की बूंद ब्रह्म में गिर जाती है. फिर हम कहीं नहीं होते.
और जब हम कहीं नहीं होते,तभी शांति और तभी आनंद और तभी अमृत का जन्म होता है.
जब तक हम है,तब तक दुःख है. जब तक हम है, तब तक पीड़ा है. जब तक हम है,तब तक परेशानी है.हमारा होना ही एन्ग्विश है,संताप है. वह हमारा अंहकार ही सारे दुखों की जद और आधार है. जब वह्नाही है,जब हम कह सकते है कि अभी मैं या तो कहीं भी नहीं हूँ, या सब जगह हूँ. उसी क्षण आनंद का उद्गम स्त्रोत शुरू हो जाता है.

 

ध्यान / मेडिटेशन का सर्वाधिक उपयुक्त तरीका क्या है. क्या कहते है ध्यान के बारे में हमारे संत
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