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आखा तीज पर गृह नक्षत्रों की स्थिति

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अक्षय तृतीया पर 24 अप्रैल को इस बार रोहणी नक्षत्र व चार ग्रहों के उच्च राशि में गोचर का विशेष संयोग रहेगा। इसे युग परिवर्तन के साथ ही देवात्माओं के जन्म का योग माना जा रहा है। अक्षय तृतीया 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। मान्यतानुसार अक्षय तृतीया पर सूर्य व चंद्रमा अपनी उच्च राशि में रहते हैं, मगर इस बार इनके साथ शनि व शुक्र भी अपनी उच्च राशि में रहेंगे।
आखा तीज पर गृह नक्षत्रों की स्थिति

इस तरह पर्व पर सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में, चंद्र अपनी उच्च राशि वृषभ, शनि अपनी उच्च राशि तुला व शुक्र स्व राशि वृषभ में गोचर करेंगे। यही नहीं इस दिन रोहणी नक्षत्र का भी योग रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तुविद डॉ. दीपक शर्मा के अनुसार भगवान परशुराम की जयंती पर ठीक ऐसा ही संयोग था। इसे युग परिवर्तन व देवात्माओं के जन्म का योग माना जा रहा है।

ज्योतिष एवं वास्तुविद बोधिसत्व चित्रगुप्त के अनुसार अक्षय तृतीया सभी तिथियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि को किए गए सभी शुभ कार्यो का फल ‘अक्षय’ यानी श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाला होता है। यही वजह है कि इस दिन मांगलिक कार्य शुभ माने जाते हैं।

दान का महत्व

अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु व उनके स्वरूप परशुराम की पूजा-अर्चना के साथ ही दान का भी विशेष महत्व है।

छत्तीसगढ़ में गरीब ब्राrाण को पानी से भरा घड़ा या सुराही, पंखा, खड़ाऊ, छाता दान किए जाने की परंपरा है।

बुंदेलखंड में कन्याएं बड़ों को शगुन बांटकर आशीर्वाद लेतीं हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से अच्छे वर की प्राप्ति के साथ जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

राजस्थान में इस दिन वर्षा के लिए शगुन गरीबों में बांटा जाता है। सतनजा ‘सात प्रकार के अन्न’ से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

मालवा में नए घड़े के ऊपर खरबूजा व आम्र पत्र रखकर पूजा की जाती है। इसके बाद उसे पंडितों को दान किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से फसल अच्छी होती है।

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