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The Spiritual Touch

Achyutanand Saraswati Ji

swami achytanand ji

०१ दिसम्बर १९७८ को पश्चिम बंगाल में कोलकाता महानगर में श्री देवीदत्त डोलिया श्री मति गीता देवी डोलिया (गौढ़ ब्राहमण ) परिवार में जन्म हुआ. प्रारम्भिक शिक्षा पश्चिम बंगाल में हुई ,तत्पश्चात राजस्थान में शुरू से ही घर में आध्यात्मिक परिवेश में पालन पोषण होने और  आध्यात्मिक विचार धरा रहने से प्रारब्ध उदय हुआ. परमपिता परमात्मा की अनुकम्पा हुई और २००४ में श्री गुरुदेव की शरण प्राप्त हुई.
६ मई २००४ को रेकी जगतगुरु संजीवनी पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित  परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा विधिवत ब्रहमचर्य योग पट की दीक्षा हरिद्वार में हुई.  श्री गुरुदेव की शरण प्राप्त कर २ मार्च २००८ तक सतत साधना का अभ्यास श्री गुरुदेव के सानिध्य में किया और ३ मार्च २००८ को श्री गुरुदेव की अनंत कृपा हुई और दशनामी परम्परा से सन्यास हुआ श्री गुरुदेव ने दंड दीक्षा दे इस शरीर को कृतार्थ किया.
मृतसंजीवनी(रेकी) विद्या में पारंगत कर १६ जुलाई २००८ को आचार्य पद देकर आदेश दिया कि अब आप स्वतंत्र रूप से अपनी विद्या के द्वारा विश्व रूप परमात्मा की सेवा में सलग्न रहो. किन्तु श्रे गुरुदेव से निवेदन किया तो उन्होंने कुछ समय और अपने पास रख जन कल्याण का मार्ग दिखाया और विश्व रूप परमात्मा के दर्शन करवाए.
अब  २००९ से श्री स्वामी जी सम्पूर्ण भारत वर्ष में मृतसंजीवनी (रेकी)  शिविर आयोजिन के द्वारा पीडितो मरीजो की सेवा में रहते है . नि:शुल्क चिकित्सा एव प्रशिक्षण देने का कार्य करते है . साथ ही अपनी वाणी द्वारा समाज को दिशा देने का प्रयास करते रहते है , किसी भी प्रकार का भेद भाव रखे बिना !! वसुधैव कुटुम्बकम !! के भाव के साथ सम्पूर्ण विश्व की शांति के हेतु अपने जीवन को सलग्न कर रखा है !
वर्तमान में राजस्थान में स्थित झुंझुनू जिले के नवलगढ़ तहसील में एक छोटी सी कुटिया में रहते है , यही से सभी कार्य सम्पादित करते है ! समय -समय पर भारत वर्ष में प्रवास कर अपनी सेवा प्रदान करते है !
मृतसंजीवनी(रेकी)  सेवा संस्थान
वार्ड न.७, हरलालका की कोठी ,
नानसागेट, नवलगढ़ ( राजस्थान)
३३३०४२ ,
सम्पर्क सूत्र- +९१९१६६४३०६०५,+९१९४६२८२७१०८

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