एक हर्बल चाय जो दूर करती है स्तन कैंसर !!

शीर्षक कुछ अटपटा सा लग रहा होगा ..चाय और कैंसर से मुक्ति ..! जी हाँ, यह शोध प्रमाणित सत्य है ..लेकिन ये चाय कोई ऐसी वैसी चाय नहीं, जिसे हम और आप रोज पीते हैंI ये तो एक हर्बल चाय है, जो हमें कैंसर से लड़ने में मददगार सिद्ध  होती है I ये बात हम नहीं शोधकर्ता कह रहे हैं ..हिंदी में धमासा,अंग्रेजी में   वर्जिन मेटल  और लेटिन में Fagonia cretica (चित्र देखें )के नाम से  मिलनेवाली जडी के फूलों से बनायी गयी हर्बल चाय का प्रयोग पाकिस्तान में स्तन कैंसर से लड़ने के लिए पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता रहा है ..I

 

यह पौधा भारत,पाकिस्तान ,अफ्रीका और यूरोप के कुछ भागों में मिलता है Iएस्टोन विश्वविद्यालय बिर्मिन्गम  के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस वनस्पति में एक तीव्र कैंसर रोधी  तत्व का पता लगाया है, जो कैंसर कोशिकाओं के शरीर में फैलने को रोकता हैI वैज्ञानिकों ने अपने शोध में यह पाया है कि इसमें पाए जानेवाले सक्रिय तत्व के प्रयोग से कैंसर कोशिकाओं के पांच से भी कम घंटे में वृद्धि रुक जाती है और चौबीस से भी कम घंटे में मृत्यु हो जाती है I वैज्ञानिक हेलीन ग्रेफिथ का कहना है कि इस जडी से बनायी गयी चाय अन्य कीमोथेरेपयूटिक एजेंट से बेहतर काम करती है और सामान्य कोशिकाओं को नुकसान भी नहीं पहुंचाती है I

पाकिस्तान में स्तन कैंसर से जूझ रही महिलाओं में इस चाय के प्रयोग से डायरिया,बालों का झडना तथा ब्लड काउंट का कम होना जैसे साइड इफेक्ट नहीं पाए गए हैं I इस जडी में पाए जानेवाले सक्रिय तत्व से युक्त चाय कैंसर पीड़ित रोगी के डी.एन.ए. स्तर पर काम करती है और इसमें आयी गडबडियों को दूर करती है Iपाकिस्तान के उत्तरी  लाहोर से एक सौ मील की दूरी पर स्थित एक अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक प्रोफ़ेसर कार्मिकल इस जडी से बनी चाय का प्रयोग लगभग चालीस वर्षों से स्तन कैंसर पीड़ित रोगियों में कर रहे हैंI इस चाय के कैंसर रोधी प्रभाव का विस्तृत अध्ययन जर्नल प्लस वन में प्रकाशित हुआ है ..Iअब शीघ्र ही इस जडी में पाए जानेवाले तत्व के अन्य सेफ्टी टेस्ट कर इसे दवा के रूप में बाजार में लाने की तैयारी की जा रही है I

(डॉ. नवीन चन्द्र जोशी के ब्लॉग “मेरी भी सुनो” से )

आध्यात्म में छिपा है अच्छा स्वास्थ्य !

लेखक का परिचय:

मैं डॉ. नवीन जोशी,एमडी आयुर्वेद। लिखना मेरा शौक है और इस माध्यम से ही विगत दो वर्षों से मैं लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करता आ रहा हूँ। मैं उत्तराखंड राज्य की पहली स्वास्थ्य पत्रिका आयुष दर्पण को भी संपादित कर रहा हूँ। अपने अंतर्मन की अभिव्यक्ति को लेखनी के माध्यम से आपके समक्ष रखने का मैं प्रयास करूँगा। आपकी सकारात्मक प्रतिक्रियाओं का सदैव मुझे इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

 

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