उदयपुर, राजसमन्द में सामूहिक पारणे, मिच्छामी दुक्कड़म

विनम्र भाव से बोला मिच्छामी दुक्कड़म

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राजसमंद. पर्युषण पर्व के तहत आठ दिनों तक तप आराधना के बाद बुधवार को जैन समाज की ओर से क्षमापना पर्व मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने सालभर में जाने अनजाने में हुई हुई गलतियों के लिए मिच्छामी दुक्कड़म बोलकर एक दूसरे से क्षमा मांगी। कई लोगों ने मोबाइल से मैसेज भेजकर क्षमा मांगी। इस अवसर पर कांकरोली में प्रज्ञा विहार, भिक्षु बोधि स्थल सहित स्थानकों पर विविध आयोजन हुए।प्रज्ञा विहार में आयोजित क्षमा याचना पर्व के तहत मुनि ताराचंद व मुनि सुमति कुमार के सान्निध्य में क्षमापना दिवस मनाया गया। इस दौरान मुनि ताराचंद ने धर्मसभा में कहा कि आज का दिन क्षमायाचना का है। वर्ष भर में किसी व्यक्ति विशेष से अनबन हुई तो सरल हृदय से क्षमाचाचना करनी चाहिए। क्षमा कायरों का नहीं वीरों का आभूषण है।मुनि सुमति कुमार ने उपस्थित जनसमुदाय से कहा कि क्षमायाचना करने से व्यक्ति प्रसन्नता का अनुभव करता है। प्रसन्न व्यक्ति सभी जीवों के प्रति मैत्रीभाव स्थापित कर लेता है। जो व्यक्ति अपने जीवन में क्षमा धर्म की आराधना कर लेता है वह अपने जीवन को सरल निर्मल व पवित्र बना लेता है। मुनि आदित्य कुमार ने कहा क्षमा देने वाला महान होता है। इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल कांकरोली, राजनगर व धोइंदा के धर्मावङ्क्षबयों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया।तेरापंथ सभा के अध्यक्ष मिश्रीलाल बोहरा, धर्मेंश डांगी, भंवरलाल वागरेचा, महेंद्र कर्णावट, मेवाड़ कांफ्रेस के अध्यक्ष वसंतीलाल बाबेल, महेंद्र कोठारी, भिक्षु बोधि स्थल के अध्यक्ष सुरेश कावडिय़ा, डॉ. विमल कावडिय़ा, तेरापंथ युवा परिषद के मंत्री धरनेंद्र मेहता, राजनगर अध्यक्ष हिम्म्म्मत मेहता, केसर बापना आदि ने क्षमापना पर्व की महत्ता बताई। इस कार्यक्रम का संयोजन तेरापंथ सभा के मंत्री प्रमोद सोनी ने किया।

क्षमापना पर्व पर भिक्षु बोधि स्थल पर विविध आयोजन हुए। यहां पर आचार्य महाश्रमण के शिष्य जतन कुमार लाडनंू और आनंद कुमार कालू के सान्निध्य में क्षमायाचना दिवस का मनाया गया। जतन कुमार ने कहा कि प्रेम से मिलजुल सीखें, मैत्री मंत्र महान…क्षमा दिवस पर गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने क्षमा का महत्व बताते हुए कहा कि क्षमा का अभ्यास साधक के लिए श्रेष्ठकर है। क्रोध एक प्रकार का कषाय व नशा है। गुस्सा उसे आता है जो सहन नहीं कर सकता है। क्षमा करने से हमारे मन का भार घटता है। क्षमा मन की सरलता का दर्शन है जो केवल छिपाने के लिए क्षमा का सहारा लेते हैं वो क्षमा नहीं केवल मुखौटा है। मुनि आनंद कुमार ने कहा कि क्षमा से घर स्वर्ग बन जाता है। क्षमा के बिना घर नरक में परिवर्तित हो जाता है। राग, द्वेष का कारण अंतकरण में क्षमा के भाव का अभाव है। उन्होंने कहा कि आने वाले पर्युषण पर्व तक हम ऐसा प्रयास करें कि हम ऐसे व्यक्ति को किसी के दिल पर घाव न हो। हम ऐया प्रयास करें कि किसी के मन में ईष्या न हो। क्षमा याचना तो हमें उनसे करनी चाहिए जिन्हें हमारे द्वारा किसी प्रकार की पीड़ा पहुंचाई गई हो।

इस अवसर पर भिक्षु बोधि स्थल के अध्यक्ष सुरेश कावडिया, मंत्री अशोक डूंगरवाल, कार्यध्यक्ष रमेश चपलोत, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की सदस्य मंजू बड़ाला, रमेश माण्डोत आदि श्रावक श्राविकाओं क्षमा याचना पर्व मनाया।

गलती से भी दिल दुखाया तो क्षमा मांग लो

नाथद्वारा. साध्वी शांताकुमारी के सान्निध्य में संवत्सरी व क्षमायाचना पर्व स्थानीय तेरापंथ सभा भवन में मनाया गया। साध्वी शांता कुमारी ने कहा कि जैन धर्म में सब धर्मों से अलग यह पर्व मनाया जाता है। वर्ष भर में अगर किसी से कोई बोल-चाल हुई है। किसी का दिल दुखाया हो, वास्तव में किसी से दुश्मनी हुई हो तो इस अवसर पर मन वचन व काया से क्षमा मांगकर व क्षमा मांगें तो माफ करने की दरिया दिली दिखाकर भाई-चारे का माहौल बनाए रखा जा सकता है। इस दौरान साध्वी चन्द्रावती, साध्वी ललीतयशा, सभा अध्यक्ष कमलेश धाकड़, मंत्री सुभाष सामोता, तेयुप अध्यक्ष राकेश कोठारी, विनोद बोहरा, महिला मंडल की पुष्पा तलेसरा, कनक धाकड़, शाबीर शुक्रिया, फतेहलाल बोहरा आदि ने समाजजनों से क्षमा याचना की। साध्वी शांता कुमारी ने मान स्मृति भवन में जाकर मेवाड़ प्रवर्तक मदन मुनि, विनय मुनि, गौतम मुनि से क्षमा याचना की।

लक्ष्मी पैलेस में संवत्सरी पर्व बुधवार को दो हजार गुरु भक्तों ने अंबेश कन्हैया दरबार में उपस्थित होकर त्याग तपस्या के साथ महापर्व का आयोजन किया। पर्व पर मदनमुनि ने अंतर्गढ़ सूत्र का वाचन, विनयमुनि ने आलोचना पाठ का वाचन, गौतम मुि ने संवत्सरी का महत्व समझाया व क्षमायाचना की।

क्षमापर्व पर उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं ने गुरूभगवंतों से क्षमायाचना की। समाज के बसंतीलाल तलेसरा ने बताया कि जसवंत ने 35, बाबूलाल हिंगड़ ने 29 की तपस्या के प्रत्याख्यान लिए तथा 1500 उपवास तप, 25 के अठाई तपस्या संपन्न हुई। अखण्ड नवकार जाप के मंगल कलश का लाभ भंवरलाल लोढा व ख्यालीलाल सिंघवी ने नवकार महामंत्र की छवि का लाभ लिया। समाज के अध्यक्ष दिलीप लोढा ने सभी गुरु भगवंतों से क्षमायाचना की।

इस अवसर पर भंवरलाल बोल्या, नंदलाल राय सोनी, लक्ष्मीलाल बडाला, प्रकाश मांडोत, अम्बालाल लोढा, सुगनसिंह सुराणा,रंगलाल डागलिया, सम्पत डागलिया, प्रकाश लोढ़ा आदि उपस्थित थे।

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आस्थावान कभी नहीं हारता : आचार्य सुकुमालनंदी 
आचार्य सुकुमालनंदी ने कहा कि धर्म में वो शक्ति है जो समस्त विश्व के शत्रुओं को परास्त कर सकती है। जिस प्रकार महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्य के बलबूते पर देश को ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्त करवाया, उसी प्रकार आज यदि इन दो सूत्रों का अनुपालन किया जाए तो विश्व में शांति कायम हो सकती है। सेक्टर 11 स्थित आदिनाथ भवन में चातुर्मास के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा कि धार्मिक व्यक्ति कभी भी निराशावादी नहीं हो सकता है और वह सदा सुखी ही रहता है। श्रावक संस्कार शिविर के तीसरे दिन भी शिविरार्थियों की जबर्दस्त भीड़ रही।आयड़ ऋषभ भवन : साध्वी सुधा कंवर ने कहा कि जैन दर्शन में क्षमापना का अत्यधिक महत्व है। क्षमा की गंगा जहां बहती है, वहां क्रोध की ज्वाला शांत हो जाती है। यह पर्व स्नेह का सृजन और वैर का विसर्जन करने का है। धर्मसभा में तेला तप करने वाले हार्दिक को सम्मानित किया गया।ओसवाल भवन : साध्वी डॉ. चंदना एवं डॉ. अक्षय ज्योति के सानिध्य में क्षमापना पर्व मनाया गया। आठ दिन तक नवकार मंत्र के जाप में काम लिए पाटिए एवं पांच मालाएं श्रावकों को प्रदान की गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय जैन कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष ऊंकार लाल सिरोया ने सभी श्रावकों का अभिवादन किया। दिनभर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाओं ने डॉ. अक्षय ज्योति एवं डॉ. चंदना से खमतखामणा के लिए आते रहे।आराधना भवन, माल दास स्ट्रीट : आचार्य दर्शन रत्न सुरीश्वर ने कहा कि चूडिय़ों की जोड़, जूतों की जोड़, कपड़ों की जोड़ मिल जाएगी, मगर मां का जोड़ मिलना इस दुनिया में असंभव है। इसलिए युवा वर्ग मां के महत्व को समझे और उसका आदर-सत्कार करें।

थोब की वाड़ी : साध्वी प्रगुणा ने कहा कि दान का महत्व बताते हुए कहा कि साधु-संत को आदर्श एवं विवेक पूर्वक आहार दान करना चाहिए। संत लोग आदर्श एवं संयम के प्रतिरूप होते हैं।

महावीर जैन समिति, सेक्टर 5 : आठ दिवस के नवकार मंत्र के जाप का समापन व सामूहिक पारणे का आयोजन किया गया। मंत्री पी.के. डागा ने बताया कि इस अवसर पर 300 पारणे हुए। नवकार मंत्र जाप की बोली कांति लाल सोनी झेली, जबकि सामूहिक पारणे का लाभ प्रेमचंद तातेड़ ने लिया।

 

सामूहिक पारणे में सैकड़ों श्रावक शामिल

 

मुनि राकेश कुमार व सहवर्ती संतों के सान्निध्य में नाइयों की तलाई स्थित तेरापंथ सभागार में क्षमापना दिवस मनाया गया। श्रावकों ने एक-दूसरे से क्षमा मांगी। सामूहिक पारणे में पांच सौ से अधिक तपस्वियों ने अपनी सहभागिता निभाई। इस अवसर पर राकेश मुनि ने कहा कि उपवास व पौषध करना भी धर्म है। प्रतिक्रमण में चौरासी लाख योनियों से खमत खामणा (क्षमा याचना) की जाती है। खमत खामणा मन से होनी चाहिए। मन में कोई वैर भावना न रहे। मुनि दीप कुमार ने किसी के प्रति द्वेष का भाव है तो उसे हमेशा के लिए त्याग दो। मुनि सुधाकर ने कहा कि समाज और परिवार में परस्पर सौहार्द को बरकरार रखने का एक उपक्रम है क्षमायाचना। तेरापंथी समाज अध्यक्ष राजकुमार फत्तावत, अणुव्रत समिति अध्यक्ष गणेश डागलिया, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष कंचन सोनी, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम अध्यक्ष गजेंद्र बोहरा, युवक परिषद अध्यक्ष विनोद मांडोत ने विचार रखे। (रिपोर्ट: भास्कर)

 

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