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अब बीमा कवर के साथ गोविंदा आला रे…

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जन्माष्टमी पर हर साल मुंबई में दही हांडी उत्सव का आयोजन किया जाता है। लेकिन धीरे-धीरे यह उत्सव महाराष्ट्र की पहचान बन गया है। इस उत्सव में मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर बंधी मटकी को फोड़ा जाता है। मटकी फोडऩे की कोशिश में गोविंदाओं को अक्सर चोट लग जाती है जबकि कई बार कुछ लोग जान भी गंवा बैठते हैं।

खतरे को देखते हुए गोविंद पथक मंडल सभी गोविंदाओं का बीमा करा रहे हैं। बीमा कंपनियों के लिए यह कारोबार का अच्छा साधन साबित हो रहा है। शायद यही कारण है कि गोविंदा पथक

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मंडलों ने बीमा राशि बढ़वा ली है जबकि बीमा कंपनियों ने प्रीमियम राशि में कमी की है।

गोविंदा आला रे………की धुन में एक बार फिर से जन्माष्टमी पर मुंबईकर थिरकने को तैयार हैं। दही हांडी फोडऩे की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। राजनीतिक दलों की ओर से घोषित लाखों रुपये के इनाम गोविंदाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

महिला गोविंदाओं की टोली भी मटकी फोडऩे के लिए कमर कस चुकी है और इनके कारनामों को देखने के लिए मुंबईकर रोमांचित हो रहे हैं। रोगंटे खड़े कर देने वाले इस रोमांचक त्योहारी खेल में हर बार हजारों गोविंदा (मटकी फोडऩे वाले दल में शामिल लोगों को गोविंदा कहा जाता है) घायल हो जाते हैं और कई बार कुछ की जान भी चली जाती है।

इस बात को ध्यान में रखते हुए गोविंदा पथक मंडलों ने अपने सभी सदस्यों का बीमा कराया है। गोविंदाओं का बीमा तो पिछले दो सालों से हो रहा है लेकिन इस बार बीमा राशि लगभग दोगुनी कर दी गई है। पिछले बार 1.5-2 लाख रुपये का बीमा किया गया था जबकि अबकी बार ज्यादातर गोविंदाओं की बीमा राशि बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर दी गई है।

कांग्रेसी नेता संजय निरुपम के अनुसार हमने सभी गोविंदाओं का बीमा करवाया है जिससे किसी अनहोनी पर उनको पैसा मिल सके। बीमा  पिछले साल भी कराया था लेकिन इस बार बीमा राशि लगभग दोगुना कर दी गई है। इस बार बीमा कवर अभ्यास से लेकर मटकी फोडऩे केदूसरे दिन तक लागू होगा, जबकि इससे पहले दही हांडी के दिन मटकी फोड़ते वक्त ही बीमा कवर

लागू होता था।
अपने गोविंदाओं का बीमा कराने वाले निरुपमा कोई अकेले नहीं है बल्कि इस बार लगभग सभी मंडलों ने बीमा कराया है। गोविंदाओं की भारी संख्या को देखते हुए कंपनियों ने प्रीमियम दर में कमी कर दी है क्योंकि यह उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

बीमा कंपनियों ने यह अवसर भुनाने के लिए खास गोविंदा बीमा योजना भी निकाली है। इसके तहत कोई भी गोविंदा अपना बीमा करा सकता है बशर्ते वह जिस मंडल का सदस्य है, उसके लेटरपैड पर यह लिखा होना चाहिए कि वह गोविंदाओं की टोली में शामिल हो रहा है। न्यू इंडिया इंश्योरेंश कंपनी के अनुसार उसने इस बार प्रीमियम में कमी की है।

इस बार तीन लाख केलिए महज 40 रुपये और 50 हजार के बीमा के लिए महज 20 रुपये का प्रीमियम लिया गया है जबकि इसके पहले इस तरह की योजना नहीं थी। इस बीमा के तहत हाथ, पैर और आंख पर चोट लगने पर बीमाधारक को पैसा मिलेगा जबकि मौत होने पर उसके घर वालों को पैसा दिया जाएंगा। इस बार मंडलों के अलावा करीबन 70 फीसदी गोविंदाओं ने इस योजना के तहत अपना बीमा करवाया है।

यह त्योहार पिछले साल स्वाइन फ्लू का शिकार हो गया था और इस कारण ज्यादातर बड़े मंडलों और राजनीतिक दलों ने अपने आयोजन रद्द कर दिये थे। लेकिन इस बार राजनीतिक दलों और गोविंदा पथक मंडलों में दही हांडी को लेकर भारी जोश देखा जा रहा है, लेकिन कई मंडलों के गोविंदाओं को मलेरिया होने से इस बार भी दही हांडी का त्योहार फीका पड़ सकता है।

वर्ली इलाके में भव्य दही हांडी का आयोजन कराने के लिए प्रसिद्ध एनसीपी नेता सचिन अहिर कहते हैं कि दही हांडी को लेकर जोश तो सभी में है लेकिन कुछ गोविंदाओं को मलेरिया होने के कारण थार (मानव पिरामिड) बनाने में परेशानी आ सकती है क्योंकि यह जोश और जुनून के साथ एकजुटता तथा संयम का खेल है जिसमें ऊपर के स्तर पर कम वजन और छोटे बच्चे होते हैं।

मुंबई के बड़े आयोजकों ने एक बार फिर से इस त्योहार को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े इनामों की झड़ी लगा दी है। प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी और मनसे ने लाखों रुपये के इनाम रखे हैं। शिवसेना ठाणे जिला संपर्क प्रमुख एवं विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में टेंभी नाके पर एक बड़े दही हांडी उत्सव का आयोजन किया है।

यह हांडी की सोने की होगी। इसे दही हांडी को ठाणे जिले की सोने की हांडी मानी जा रही है। बतौर एकनाथ शिंदे हांडी की कीमत तीन लाख रुपये है। हांडी फोडऩे का प्रयास करने वाले प्रत्येक गोविंदा पथक मंडल को 1 लाख 51 हजार रुपये और हांडी फोडऩे वाले को 4 लाख 51 हजार रुपये बतौर इनाम दिए जाएंगे।

महिला गोविंद पथकों की प्रत्येक सलामी देने वाली टोली को 51 हजार रुपये इनाम और मांसाहेब (मीनाताई) की एक ट्राफी दी जाएगी। जोश और जूनून केइस त्योहार में महिला गोविंदा पथकों ने बराबरी की आवाज उठाते हुए उन्हें भी पुरुष गोविंदाओं के बराबर इनाम देने की मांग की है।

BY- Sushil Mishra
(Courtsy: Business Standerd)

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