SatsangLive

The Spiritual Touch

मीरा बाई के पद (Part -01)

 

राग अलैया

meera

तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे नागर नंदकुमार।

मुरली तेरी मन हरह्ह्यौ बिसरह्ह्यौ घर ब्यौहार।।

जबतैं श्रवननि धुनि परी घर अंगणा न सुहाय।

पारधि ज्यूं चूकै नहीं म्रिगी बेधि द आय।।

पानी पीर न जान ज्यों मीन तडफ मरि जाय।

रसिक मधुपके मरमको नहीं समुझत कमल सुभाय।।

दीपकको जो दया नहिं उडि-उडि मरत पतंग।

मीरा प्रभु गिरधर मिले जैसे पाणी मिलि गयौ रंग।।९।।

 

———————————————————————

राग सोरठ

 

जोसीडा ने लाख बधाई रे अब घर आये स्याम।।

आज आनंद उमंगि भयो है जीव लहै सुखधाम।

पांच सखी मिलि पीव परसिकैं आनंद ठामूं ठाम।।

बिसरि गयो दुख निरखि पियाकूं सुफल मनोरथ काम।

मीराके सुखसागर स्वामी भवन गवन कियो राम।।१०।।

 

शब्दार्थ – जोसीडा ज्योतिषी। पांच सखी पांच ज्ञानेन्द्रियों से आशय है।

ठां जगह। सुफल पूरी हु। राम प्रियतम स्वामी से आशय है।

———————————————————————

राग परज

 

सहेलियां साजन घर आया हो।

बहोत दिनांकी जोवती बिरहणि पिव पाया हो।

रतन करूं नेवछावरी ले आरति साजूं हो।

पिवका दिया सनेसडा ताहि बहोत निवाजूं हो।।

पांच सखी इकठी भ मिलि मंगल गावै हो।

पियाका रली बधावणा आणंद अंग न मावै हो।।

हरि सागर सूं नेहरो नैणां बंध्या सनेह हो।

मीरा सखी के आंगणै दूधां बूठा मेह हो।।११।।

 

शब्दार्थ – साजन प्रियतम। जोवती बाट देखती। सनेसडा सन्देश।

रली बधावनां आनन्द बधाई। नेहरो स्नेह। बंध्या फंस गये।

दूधां दूध की धारों से। बूठा बरसे।

———————————————————————

पियाजी म्हारे नैणां आगे रहज्यो जी।।

नैणां आगे रहज्यो म्हारे भूल मत जाज्यो जी।

भौ-सागर में बही जात हूं बेग म्हारी सुधि लीज्यो जी।।

राणाजी भेज्या बिखका प्याला सो इमरति कर दीज्यो जी।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर मिल बिछुडन मत कीज्यो जी।।१२।।

 

———————————————————————

 

राग कजरी

 

म्हारा ओलगिया घर आया जी।

तन की ताप मिटी सुख पाया हिल मिल मंगल गाया जी।।

घन की धुनि सुनि मोर मगन भया यूं मेरे आनंद छाया जी।

मग्न भ मिल प्रभु अपणा सूं भौका दरद मिटाया जी।।

चंद कूं निरखि कमोदणि फूलैं हरषि भया मेरे काया जी।

रग राग सीतल भ मेरी सजनी हरि मेरे महल सिधायाजी।।

सब भगतन का कारज कीन्हा सो प्रभु मैं पाया जी।

मीरा बिरहणि सीतल हो दुख दंद दूर नसाया जी।।१३।।

 

शब्दार्थ -ओलगिया परदेसी प्रियतम। घन की धुनि बादल की गरज।

भौ का दरद संसारी दुख। कमोदनि कुमुदिनी। सिधाया पधारा।

दंद द्वन्द्व झगडा। नसाया मेट दिया।

———————————————————————

राग ललित

 

हमारो प्रणाम बांकेबिहारी को।

मोर मुकुट माथे तिलक बिराजे कुंडल अलका कारी को।।

अधर मधुर पर बंसी बजावै रीझ रिझावै राधा प्यारी को।

यह छवि देख मगन भ मीरा मोहन गिरधर -धारी को।।१४।।

 

शब्दार्थ – अलका कारी काली अलकें। रिझावै प्रसन्न करते हैं।

———————————————————————

प्रेमालाप

 

 

थांने हम सब ही की चिंता तुम सबके हो गरीबनिवाज।।

सबके मुगट सिरोमणि सिरपर मानीं पुन्यकी पाज।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर बांह गहेकी लाज।।१।।

 

———————————————————————

राग हमीर

 

आ सहेल्हां रली करां है पर घर गवण निवारि।।

झूठा माणिक मोतिया री झूठी जगमग जोति।

झूठा आभूषण री सांची पियाजी री प्रीति।।

झूठा पाट पटंबरा रे झूठा दिखडणी चीर।

सांची पियाजी री गूदडी जामें निरमल रहे सरीर।।

छपन भोग बुहाय देहे इण भोगन में दाग।

लूण अलूणो ही भलो है अपणे पियाजीरो साग।।

देखि बिराणे निवांणकूं है क्यूं उपजावे खीज।

कालर अपणो ही भलो है जामें निपजै चीज।।

छैल बिराणो लाखको है अपणे काज न होय।

ताके संग सीधारतां है भला न कहसी कोय।।

बर हीणो अपणो भलो है कोढी कुष्टी कोय।

जाके संग सीधारतां है भला कहै सब लोय।।

अबिनासीसूं बालबा हे जिनसूं सांची प्रीत।

मीरा कूं प्रभुजी मिल्या है ए ही भगतिकी रीत।।२।।

 

———————————————————————

राग प्रभाती

 

जागो म्हांरा जगपतिरायक हंस बोलो क्यूं नहीं।।

हरि छो जी हिरदा माहिं पट खोलो क्यूं नहीं।।

तन मन सुरति संजो सीस चरणां धरूं।

जहां जहां देखूं म्हारो राम तहां सेवा करूं।।

सदकै करूं जी सरीर जुगै जुग वारणैं।

छोडी छोडी लिखूं सिलाम बहोत करि जानज्यौ।

बंदी हूं खानाजाद महरि करि मानज्यौ।।

हां हो म्हारा नाथ सुनाथ बिलम नहिं कीजिये।

मीरा चरणां की दासि दरस फिर दीजिये।।३।।

 

———————————————————————

राग हमीर

 

हरी मेरे जीवन प्रान अधार।

और आसरो नाहीं तुम बिन तीनूं लोक मंझार।।

आप बिना मोहि कछु न सुहावै निरख्यौ सब संसार।

मीरा कहै मैं दासि रावरी दीज्यो मती बिसार।।४।।

 

———————————————————————

 

(wikilinks)

 

So, what do you think ?