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उदयपुर का गणगौर महोत्सव (फोटो)

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उदयपुर के प्रसिद्द गणगौर महोत्सव, जिसे मेवाड़ महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, की रंगारंग शुरुआत 25 मार्च 2012 की शाम हुई. इस बार महोत्सव में कुल चौदह समाजों की गणगौर शामिल हुई. सभी गणगौर का जगदीश चौक में मिलन हुआ. तत्पश्चात जुलूस के रूप में गणगौर और ईसर पिछोला झील किनारे गणगौर घाट की ओर रवाना हुए. उल्लेखनीय है कि ईसर और गणगौर को शिव-पार्वती का स्वरुप माना जाता है. तीन दिवसीय गणगौर महोत्सव के प्रथम दिन गणगौर को घाट पर लाकर जल के कुसुम्बे (जल ग्रहण) दिए जाते है. तत्पश्चात उन्हें पुनः समाज के नोह्ररों में ले जाया जाता है.
पिछोला झील किनारे सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत मांगीबाई आर्य के मांड गायन से हुई. मांगीबाई ने पहले “पधारो म्हारे देस” के राग छेड़े, तत्पश्चात “पूजन दो गणगौर” सुनाया. माँड के बाद स्थानीय कलाकारों द्वारा घूमर, टोंक के कलाकारों ने कच्छी घोड़ी नृत्य, बाड़मेर की गैर,जोधपुर के दल ने कालबेलिया नृत्य, भरतपुर के कलाकारों द्वारा फूलों की होली नृत्य प्रस्तुत किया गया.
कार्यक्रमों के दौरान आसपास के होटलों की छतें और घाट पर देसी-विदेशी पर्यटकों की खूब भीड़ रही.
गणगौर महोत्सव और सजी धजी गणगौर प्रतिमाओं के कुछ दृश्य -

gangaur005उदयपुर के इस प्रसिद्द गणगौर महोत्सव, जहाँ विभिन्न समाजों की गणगौर के साथ साथ महिलाएं इतनी सजती है कि वे भी किसी गणगौर से कम नहीं लगती.. के और फोटोग्राफ्स देखने हेतु कृपया हमारे फेसबुक पृष्ठ ( www.facebook.com/SatsangLive ) जायें.. हमें यकीन है, हमारी टीम की मेहनत ज़ाया नहीं जायेगी और आपको फोटो पसंद आयेंगे.

 

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