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Morari Bapu in Nathdwara: दूसरा दिन

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नाथद्वारा। मिराज गु्रप द्वारा आयोजित रामकथा के दूसरे दिन बापू ने हनुमान स्तुति व रामधून के साथ कथा प्रारंभ की। इससे पूर्व बापू के मंच पर आने व व्यासपीठ पर विराजने के दौरान शंखनाद हुए।

शंख की ध्वनि के साथ ही मिराज सीएमडी बापू को व्यासपीठ तक लाए। बापू व्यासपीठ को प्रणाम कर विराजित हुए। साथ ही हनुमान चालीसा से पांडाल गूंज उठा। कथा के शुभारंभ में पं. रामचन्द्र दिक्षित के मंत्रोच्चार के बीच सीएमडी मदनलाल पालीवाल, पुत्र मंत्रराज पालीवाल तथा पुत्री माधवी पालीवाल के साथ आरती की। सीएमडी पालीवाल फिल्म स्टार सुनील शेट्टी, बांसूरी वादक बलजींदर सिंह, निलेश भारती एवं प्रिंस ग्रुप के कलाकारों ने बापू व व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया व पुष्प अर्पित किए।
बापू ने कहा कि भगवान शिव की तीन आंखे है। दांयी आंख सत्य की आंख है, बांयी करूणा की आंख है, बीच की आंख प्रेम की आंख है जो अग्निरूपा है । बापू ने मानस प्रेम की रसधार बहाते हुए कहा कि पे्रम एक आग है इसमें उतरकर ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है। कौशल्या के घर में परमात्मा था इसीलिए वहां पर राम प्रगट हुए। प्रेम को उपासना बताते हुए बापू ने कहा कि पे्रम कभी भी वासना नही हो सकता है। आत्मा, मन, बुद्धि, अंहकार, आनन्द जिस प्रकार सभी में होते है वैसे ही प्रेम भी सबमें होता है मगर झूठ के कारण पे्रम प्रगट नही हो पाता है। बापू ने प्रेम के दो रूप बताते हुए कहा कि प्रेम विकृत तथा संस्कृ त होता है। विकृत प्रेम में प्रतिशोध की भावना तथा भीषणता होती है जबकि संस्कृवत प्रेम शालीन तथा मर्यादा में सुशोभित होता है।

बापू ने कहा कि आदमी तीन प्रकार के अपराध करता है एक आदतवश, दूसरा अनचाहा तथा तीसरा मुढ़ता के कारण। उन्होने कहा कि अगर आदमी की मानसिकता सत्य की उपासना वाली हो तो परमात्मा सभी मजबूरिया मिटा देता है। असत्य आता है तो प्रेम का प्रवाह अवरूद्व हो जाता है। बापू ने कहा कि पैसा और लक्ष्मी में बडा अन्तर होता है। ऐसा धन जिसे परसेवा में बाँटने में कष्ट होता हो वो पैसा होता है और ऐसा धन जिसे जनसेवा में खुलकर लगाया जाए वो लक्ष्मी का रूप होता है। बापु ने पर्यावरण को इंगित करते हुए कहा कि हर एक वृक्ष व वनस्पति नारायण का रूप है इसलिए आदमी को खूब पेड़ लगाकर चारों तरफ पेड़ लगाने चाहिए।  प्रेम आग है, सूर्य जलाता है पर दूर है, चांद भी शीतलता देता है पर दूर है पर प्रेम हमारे अंदर है। परमात्मा सब जगह समान रूप से व्याप्त है। वह केवल प्रेम से प्रकट हो सकता है। जो होता है वही प्रकट होता है। कौशल्या के महल में परमात्मा का प्रकटन था इसलिए भय प्रकट कृपाला। प्रेम हम सभी में है जैसे आत्मा, मन, बुद्धि, अहंकार, ज्ञान, आनंद, परमात्मा सब में है। उसी तरह प्रेम भी सब में है। सारा संसार प्रेम से बना है। प्रेम इक्कीस वीं सदी का मूल मंत्र है। उन्होंने चेताया कि यहां प्रेम की वार्ता हो रही है वासना की नहीं, उपासना की चर्चा है।

भक्ति मणि पारस मणि से भी अमूल्य

 

बापू ने प्रेम रूपी भक्ति मणी को पारस मणी से भी अधिक मूल्यवान बताते हुए कहा कि पे्रम आदमी को घर, परिवार, देश व परदेश में सदैव प्रसन्न रखता है। गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि प्रसन्नता से सभी दुखों का नाश हो जाता है तथा प्रेम होने पर सत्य का वास हो जाता है।
रामरोटी तो श्रीजी बाबा का राजभोग है
मुरारी बापू ने कहा कि इस रामकथा के साथ मदन पालीवाल द्वारा जो रामरसोडा संचालित किया जा रहा है और जिसमें भक्तों के लिए रामरोटी की व्यवस्था की गई है वो तो श्रीजी प्रभु का राजभोग है इसलिए सभी भक्तों से मेरा निवेदन है कि रामरोटी जरूर ग्रहण करके जाए। प्रसाद से बढक़र कुछ नही होता है। बापू ने रामरसौडे को नाथद्वारा का भण्डारा बताते हुए कहा कि प्रसाद के दो अर्थ होते है एक तो प्रसन्नता तथा दूसरा स्वास्थ्य।
मन को देखकर मेहमान बनो महल देखकर नही
मुरारी बापू ने कहा कि आदमी को मन देखकर ही किसी का मेहमान बनना चाहिए न की महल देखकर। जहां पर आदर नही मिले ऐसी जगह आदमी को नही जाना चाहिए परन्तु पे्रमयज्ञ में बिना निमत्रंण के जा सकते है। उन्होने कहा कि प्रेम में काम और लोभ बाधक नही होते है मगर क्रोध बाधक होता है।
घर बेटी जन्मे तो शगुन मनाओ
मुरारी बापू ने रविवार को व्यास पीठ से आव्हान किया कि हरहाल में हम सबको, पूरे विश्व को मिलकर कन्या भ्रूण हत्या को रोकना होगा। बापू ने कहा कि सभी घर में बेटा पैदा होने पर खुशी मनाते है मगर घर में बेटी पैदा होतो सबकों शगुन मनाना चाहिए। बापू ने कहा कि कन्या में सात विभुतियाँ विद्यमान होती है। बापू ने कहा कि बेटे के जन्म से सवाया उत्सव बेटी के जन्म का मनाओं इससे देश और सम्पूर्ण विश्व का गौरव बढ़ेगा।
विश्वास का साक्षात रूप शिव है
मुरारी बापू ने भगवान शिवशंकर को विश्वास का साक्षात रूप बताते हुए कहा कि शिव निष्काम, उदासीन, जोगी, जटिल अमान है। बापू ने कहा कि विश्वास अगुण होता है उसके माँ-बाप नही होते है विश्वास अजन्मा होता है। बापू ने कहा कि विश्वास कभी भी भोगी नही हो सकता है वो तो सदैव योगी ही होता है। विश्वास को बिना आँख वाला बताते हुए उन्होने कहा कि जहां पर विश्वास होगा वहां पर कामना नही हो सकती है।
भरोसो दृढ़ इन चरणन तेरो
भरोसे को भगवान की विभूति बताते हुए बापू ने कहा कि संसार में अगर साधकों की भक्ति है तो वो है भरोसा। बापू ने कहा कि वल्लभीय परम्परा में भी अष्ट सखाओं ने भरोसो दृढ़ इन चरणन तेरों साधन और नही या कलि में जासो होत निवोरो इस एक ही पद में प्रभु के साथ सम्पूण संसार को बांध दिया है। बापू ने कहा कि भरोसा ही परमात्मा का श्रृंगार होता है। उन्होने कहा कि लोग जितना छले उतना छले जाओं मगर भरोसा मत छोडों।
फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी ने लिया बापू का आशीष

मिराज ग्रुप की और से नाथद्वारा में चल रही रामकथा में रविवार को मुम्बई से फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी, कलाकार बलजिन्दर सिंह,अमित, रूपेश, कमलेश ने शिरकत की। सुनील शेट्टी व कलाकारों का मुरारी बापू ने शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। सुनील शेट्टी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मिराज ग्रुप द्वारा नाथद्वारा जैसे छोटे शहर में ऐसा भव्य आयोजन किया है जो आश्चर्यचकित करने वाला है। शेट्टी ने मिराज ग्रुप के सीएमडी मदन पालीवाल को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके द्वारा किए जा रहे इस आयोजन के कारण ही उनको तथा लाखों लोगों को मुरारी बापू के श्रीमुख से रामनाम की ज्ञानगंगा में डुबकी लगाने का अवसर मिल रहा है। शेट्टी भोजनशाला में भी गए और उन्होने अपने हाथों से भक्तों को रामरोटी परोसी। रामरोटी के लिए उमडे जनसैलाब को देखकर शेट्टी अभिभूत हो गए।
रामरोटी के लिए उमड़ा जनसैलाब
रामकथा के दूसरे दिन कथा स्थल के पास स्थित भोजनशाला में रामरोटी प्राप्त करने के लिए हजारों भक्तों का जनसैलाब उमड़ पडा। कथा समाप्त होते ही भोजनशाला के बाहर लम्बी कतारे लग गई। ज्ञातव्य है कि मिराज ग्रुप द्वारा दो लाख स्क्वायर फीट में विशाल भोजनशाला बनाई गई है। कथा स्थल से लेकर लाल बाग तक भक्तों का रैला लगा रहा। नाथद्वारा शहर के अलावा आस-पास के ग्रामीण क्षैत्रों तथा पूरे देश के कोने-कोने से हजारों भक्त कथा सुनने आ रहे है। नाथद्वारा में महाकुंभ जैसा माहौल नजर आ रहा है।(साभार:उदयपुर न्यूज़  )

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