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Morari Bapu in Nathdwara: चौथा दिवस

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कथा आरम्भ से पूर्व आरती उतारते मदन पालीवाल एवं हेमा मलिनी

नाथद्वारा. (राजसमंद)। कुछ अलग ही अनुभूति है यहां (लाल बाग स्टेडियम) की। भव्य पांडाल, मुरारी बापू जैसे शीतल संत के मुखारविंद से रामकथा के रूप में प्रस्फुटित होती दिव्य वाणी, 70 हजार के करीब श्रोता, तमाम जरूरी सुविधाएं। रात को होने वाली सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश-विदेश में ख्यात फनकारों की प्रस्तुतियां। नगरी है श्रीकृष्ण (श्रीनाथजी) की, लेकिन चहुंओर राम नाम। यह दृश्य है नाथद्वारा के लाल बाग स्टेडियम का। यहां मिराज ग्रुप के सीएमडी मदन पालीवाल की ओर से मुरारी बापू इन नाथद्वारा के तहत मानस पाठ चल रहा है। आयोजन के चौथे दिन मंगलवार को और भव्यता बढ़ गई जब रामजन्म का प्रसंग आया। रात के कार्यक्रमों में प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने लाजवाब प्रस्तुतियों से सभी को झूमा दिया। इससे पहले फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने भी बापू के दर्शन पाकर कथा सुनी।

 

राम जन्म प्रसंग पर बापू कुछ इस तरह नज़र आये

कौन हैं राम ? बापू से जानो
मुरारी बापू ने कथा के दौरान कहा कि पार्वती जब शिव से पूछती हैं कि उन्हें एक जन्म के बाद भी संदेह है कि राम मनुष्य हैं या पर ब्रम्ह। तब शिव कहते हैं जो बिना पैर चले, जो बिना कान सुने, हाथ के बिना सभी काम करे, जुबां के बिना शब्द बयां करे वो राम हैं। आकाश, अग्नि, वायु, सूर्य सब राम हैं, वनस्पति राम हैं। बापू ने राम जन्म के मानस के आधार पर कई कारण भी बताए।

कैलाश ने गाया, हजारों को नचाया
‘ढोल बजता, तुम्बा बजता, तुम्बा बजता, ढोल बजता, तेनू हौले-हौले…’ पंजाबी व अन्य भाषाओं के रीमिक्स गाने पर जब कैलाश खेर की दमदार मस्त मौला सी, ऊफनती हुई नदी सी आवाज से मस्ती का रंग चढ़ाया तो जैसे सारा नाथद्वारा मस्ती के रंग में रंग गया। तेज संगीत, रंग-बिरंगी लाइट की चकाचौंध और हजारों लोगों की मौजूदगी के बीच कैलाश खेर ने आयोजक मिराज सीएमडी मदन पालीवाल सहित हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया। मिराज गु्रप द्वारा आयोजित मुरारी बापू इन नाथद्वारा के चौथे दिन मंगलवार शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत हुई इस गजब की गायकी से राम नाम से सराबोर श्रोताओं को मस्ती को चरम तक पहुंचा दिया।
लालबाग स्टेडियम में कार्यक्रम की शुरुआत 7 बजे के करीब हुई। कैलाश ने सबसे पहले ‘जाणा जोगी रे नाल दी, की मैं जाणा, नी मैं जाणा’ से शुरुआत की। दिल की गहराई से निकलती आवाज में आओ जी आओ जी सुनाया तब उनके हर अंतरे, हर अदा पर लोग रीझते रहे।

तेरी दीवानी-दीवानी, तेरी ये नगरी दीवानी

‘प्रीत की लत मोहे ऐसी लागी हो गई मैं मतवारी…….’ जाने नाथद्वारा सारी। दीवानी, दीवानी तेरी ये नगरी दीवानी गीत पर जैसे सारा पांडाल ही दीवान हो उठा। इन दीवानों ने मस्ती में मस्ती की ऐसी अलख जगाई कि देर रात तक लोगबाग इस मस्ती के आलम में सराबोर होकर मस्ती का रसपान करते रहे।

लाजवाब प्रस्तुति
कैलाश ने मंच पर एक मजे हुए कलाकार के तौर पर प्रस्तुति दी। उन्होंने मंच की हर विधा को शानदार अंदाज में पेश किया। एंकरिंग हो या गाने के हर अंदाज पर ठुमके लगाना, आंखें मटकाना ,उनकी बॉडी लेंग्वेज ,उनकी आवाज उनकी हर अदा , उनके हर बोल पर सारा पांडाल रिझता रहा ओर वे देर रात तक विभिन्न गानों पर अपनी ही मस्ती में मस्ती का रंग बरसाते रहे।

 

बापू से भी की गुजारिश
कैलाश मस्ती के रंग की ओढ़ानी में इतने मस्त थे कि उन्होंने बापू से भी बड़े ही विनम्र शब्दों में, मस्ती भरे आलम में, मस्ती भरे अंदाज में उनकी उस मस्ती के रंग में रंगी ओढऩी के रंग में रंग जाने का आग्रह किया। बापू ने भी अपने इस मस्त मौला शिष्य का आग्रह स्वीकार करते हुए खड़े होकर अपना बायां हाथ ऊंचा कर दिया। मानो नटराजरूपी शिव ने नृत्य की मुद्रा में अपने हाथ ऊपर कर दिए हों।

 

कैलाश खेर की प्रस्तुति पर स्वयं बापू भी झूम उठे

मस्ती के रंग की ओढऩी
कैलाश के ‘रंग दी, रंग दी री रंग दी री पिया के रंग ओढ़ दी ओढऩी ‘गीत पर जैसे सारा पंाडाल मस्ती के रंग में रंग गया। कैलाशा ने भी मस्ती के रंग की ऐसी ओढऩी ओढ़ाई कि श्रोताओं के जोश व मस्ती को रोकने में सुरक्षाकर्मियों व स्वयंसेवकों को काफी मश्कक्त करनी पड़ी। कैलाशा ने श्रोताओं से कहा कि जो तन व मन से यहां हैं उन्हें बधाई तथा जो बावले होकर नाच रहे उन्हें बड़ी बधाई। (रिपोर्ट भास्कर एवं प्रेस नोट पर आधारित, एवं फोटो:उदयपुर इन एवं भास्कर )

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