Morari Bapu in Nathdwara: छठा दिन

बापू का स्केच (भास्कर )

बापू ने दिया राष्ट्र देवो भव:, प्रेम देवो भव:, परस्पर देवो भव: का संदेश

नाथद्वारा । मुरारी बापू ने जब धरती धोरा री, धोरा री, या धरती धोरा री, चंदा अमृत रस बरसावे, या धरती धोरा री… गीत गाया तो मानो भव्य पांडाल में अमृत रस बरस गया। प्रकृति भी प्रतिदिन रामकथा के बाद रिमझिम-रिमझिम बरस कर जैसे प्रेम बरसा रही हो। हो भी क्यों नहीं जब रामकथा मर्मज्ञ मानस प्रेमकथा का वाचन कर रहे हों। बापू मानस कथा के माध्यम से नित प्रेम की बारिश कर रहे हैं। सुबह से शाम तक हर ओर परस्पर मानस प्रेम रामकथा की चर्चा। यह है मानस कथा का असर। लोगों की दिनचर्या तक बदली।

मौका है मिराज ग्रुप के सीएमडी मदन पालीवाल की ओर से चल रहे मुरारी बापू इन नाथद्वारा के छठे दिन का। गुरुवार को मानस कथा में बापू ने राम के बाल्यकाल के बाद के प्रसंगों का मार्मिक और सजीव चित्रण किया। इस दौरान कथा भाव के अनुसार भक्त भी भावविह्वल होते दिखे। बापू ने कहा कि परस्पर एक दूसरे को देव समान आदर देना चाहिए, प्रेम देना चाहिए। उन्होंने श्रोताओं के दोनों हाथ उठवा कर कहा कि राष्ट्र देवो भव:, प्रेम देवो भव: और परस्पर देवो भव:।

मानस कथा में क्या-क्या

विश्वामित्र का आगमन : बापू ने कहा कि जब ऋषि विश्वामित्र अवध के राजमहल में पहुंचते हैं तब राजा दशरथ उन्हें आदर से अपने सिंहासन पर बैठाते हैं। राजा थोड़े से चिंतामग्न हैं कि ऋषि का आगमन अकारण नहीं हो सकता। आखिर क्या बात है। ऋषि के आने की खबर राजमहल में फैल जाती है। रनिवास तक बात पहुंचती है। एक ओर जहां महात्मा के आने से राजा विचारमग्न हैं वहीं मां कौशल्या पुलकित हो उठती हैं।

मां कौशल्या का सपना : मां कौशल्या आतुरता से रसोई में जाकर स्वयं अपने हाथों से नाना प्रकार के व्यंजन बनाती हैं। दास-दासियां अन्य रानियां आश्चर्यचकित हैं। पूछने पर मां कौशल्या कहती हैं कि क्या तुम्हें याद नहीं कुछ दिन पहले एक ज्योतिष महात्मा आए थे।

उन्होंने कहा था कि तेरे लाल को एक महात्मा ले जाएगा और जब राम लौटेगा तो सुंदर सी बहू लाएगा। इधर ऋषि के राजकुमारों को साथ ले जाने की बात पर राजा दशरथ राम-लक्ष्मण को उनके साथ विदा करते हैं।

 

अहिल्या का उद्धार, निषाद का मान
विवेक बिन सब निरर्थक
प्रसंगवश बापू ने कहा कि कथा सुनते-सुनते आप में, मुझमें विवेक जग जाए तो उससे भी प्रेम प्रकट हो जाता है। विवेक के लिए सत्संग आवश्यक है। बलवान में विवेक नहीं तो उसका बल किसी काम का नहीं। किसी भी कला में विवेक नहीं तो वह कला बांझ है। विद्या में विवेक नहीं हो तो विद्या बांझ है। धनवान के पास धन है ओर विवेक नहीं तो वह धन किसी काम का नहीं। बापू ने कहा कि हमारे जीवन की गति दो पहियों पर चलती है। एक विश्वास और दूसरा है विचार। इन्हीं दो पहियों पर हमारा जीवन चलता है। यह धुरी नहीं हो तो जीवन के पहियों की गति रुक जाती है। विवेक नहीं हो तो कोई भी कला, कोई भी विद्या, बल, धन, तेज कुछ भी नहीं है।जनकपुरी जाते समय प्रभु श्रीराम रास्ते में पत्थर बनी समाज से तिरस्कृत अहिल्या का उद्धार करते हैं। बापू ने रामकथा के दौरान कहा कि राम वनवास के दौरान गंगा के तट पर विश्राम करते हैं। भीलों के राजा निषाद को प्रतिष्ठित करने प्रभु उसके पास जाते हैं। स्वयं पर ब्रम्ह चल कर निषाद के पास पहुंचते हैं। प्रभु जंगल में वृक्ष के नीचे घास के बनाए गए बिछौने पर विश्राम करते हैं।

आ लग जा गले, फिर कभी हसीं रात हो ना हो… 
नाथद्वारा। कसमें वादे प्यार वफा सब, बाते हैं बातों का क्या…..आसमान में उडऩे वाले, मिट्टी में मिल जाएगा… जैसे बोल के साथ आवाज पांडाल मेंं गूंजी तो हर कोई मदमस्त हो गया। देर तक पांडाल में तालियों की गडग़ड़ाहट होती रही। मिराज गु्रप के मुरारी बापू इन नाथद्वारा कार्यक्रम के तहत गुरुवार रात को रूपकुमार राठौड़ व सोनाली राठौड़ ने जुगलबंदी में एक से बढ़कर एक भक्ति के ऐसे रंग बिखेरे कि मुरारी बापू भी दाद देते रहे। कार्यक्रम की शुरूआत 7 बजे के करीब हुई।सोनाली राठौड़ ने पायो जी मैंने राम रतन धन पायो…भजन से शुरुआत की। पांडाल में जैसे ही सोनाली की सुरिली आवाज गूंजी तो अध्यात्म की नगरी पर जैसे राम रतन धन की वर्षा हो गई। सोनाली ने मीरा का गीत चालो माही देश सुना कर खूब तालियां बटोरी। ख्वाजा मेरे ख्वाजा..गाने से रूप कुमार राठौड़ ने शुरुआत की। अपनी दमदार आवाज में रूप ने करीब 25 हजार श्रोताओं को ख्वाजा की ऐसी दुआ सुनाई कि सभी मंत्रमुग्ध हो गए। श्रोताओं ने करतल ध्वनि के साथ रूप का साथ दिया। सोनाली ने सुरिली, मीठी आवाज में श्रोताओं को इश्क का कलमा पढ़ाया। उन्होंने मुझे इश्क का कलमा, इश्क का कलमा, याद रहा मैं बाकी सब भूल गई, एक नाम पिया का याद रहा… का कलमा सुनाया। लागा चुनरी में दाग छिपाऊं कैसे, घर जाऊं कैसे… सुनाकर रूप कुमार ने बापू सहित अतिथियों का दिल जीत लिया।

, मिराज सीएमडी पालीवाल, अतिथियों व श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस दौरान रूप-सोनाली ने तबला, हारमोनियम पर आलाप किया।

ऐसी तान छेड़ी कि बापू भी मंद मंद मुस्कुराते हुए उन्हें दाद देते रहे। सोनाली ने जब अपनी खनकती आवाज का जादू लग जा गले फिर ये हसीन रात हो न हो… गीत पर बिखेरा तो ऐसा लगा कि यह रात खत्म न हो तथा रूप-सोनाली यूं ही रंग बिखेरते रहें।

संदेशे आते हैं…पर झूमे श्रोता

रूप के संदेशे पर लोग झूम उठे जब उन्होंने बॉर्डर फिल्म के संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं… सुनाया। रूप ने मन लागों मेरो यार फकीरी में सहित अन्य कई प्रस्तुतियां पेश कीं। सोनाली ने यारा सिली-सिली, बिरहा की रात का जलना सहित एक से बढ़कर एक गीत पेश किए।

सुरों संग बहते रहे श्रोता

लालबाग स्टेडियम में गुरुवार की शाम रूप कुमार राठौड़ और सोनाली की दिलकश प्रस्तुतियों के दौरान हजारों श्रोता सुरों संग-संग बहते रहे। दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों ने देर रात तक लोगों को मंत्र मुग्ध किए रखा। प्रस्तुति के दौरान कई लोग आंखें बंद किए सुर और संगीत की गहराई में गोते लगाते हुए नजर आए। कई प्रस्तुतियों पर लोग वाह-वाह कर उठे। (Bhaskar)

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