Morari bapu in Nathdwara: सातवा दिन

बहू बनें जानकी, सास हो कौशल्या सी
गुजराती में एक कहावत है सासु न चौमासू क्यारे आवे, ई खबर नत पड़ती। मतलब सास और बारिश कब आ जाए कौन बता सकता है। कितनी सास के कारण कितनी ही बहुओं को असमय अपने प्राण त्यागने पड़ते हैं। देश, समाज इससे बाहर आए। हर सास अपनी बहू में जानकी देखने लगेंगी तो बहू अपनी सास में कौशल्या देखेगी। सास और बहू के बीच प्रेम भरा इस तरह का रिश्ता होगा तो हमारे देश का भला हो जाएगा।

यह कहना है शीतल संत मुरारी बापू का। मिराज ग्रुप के सीएमडी मदन पालीवाल द्वारा आयोजित मुरारी बापू इन नाथद्वारा के तहत लाल बाग स्टेडियम में मानस कथा के सातवें दिन शुक्रवार को सास-बहू के रिश्तों की व्याख्या करते हुए यह बात कही। मानस कथा में राम के जनकपुरी भ्रमण और जानकी से भेंट का वर्णन हुआ।

मुरारी बापू ने की रामकथा के दौरान प्रेम तथा भक्ति की व्याख्या, कहा-पंथ की कट्टरता से ईश्वर को छोटा मत करो। मानस प्रेम  के सातवें दिन राष्ट्रसंत मुरारी बापू ने कहा कि ईश्वर का कोई आकार-अंग नहीं होता, अल्लाह की कोई जात नहीं होती। इश्क ही अल्लाह या प्रेम ही परमात्मा है।

बापू ने नाथद्वारा में चल रही नौ दिवसीय रामकथा में मानस प्रेम चर्चा के दौरान शुक्रवार को हजारों रामकथा श्रोताओं को मानस प्रेम सरिता में सबको भीगो दिया। कथा श्रवण करने वाले भक्त-श्रोताओं ने भी जैसे बापू के मुखारबिंद से बरस रहे ज्ञान मोतियों को सहेज प्रेम की मालाएं पिरोयी। श्रोताओं ने प्रेम और भक्ति के बीच सुक्ष्म व दृढ़ संबंध को समझा। बापू ने प्रेम को नेम (नियम) से बड़ा बताया। नारद भक्ति सूत्र से आचार्यों की महिमा का वर्णन किया।

रामकथा सुनने आए श्रोताओं से बापू ने कहा कि मन की सरलता जरूरी है। साधु मन कभी मान-अपमान में प्रतिक्रया नहीं करता। उनका स्वभाव पर्वत  सा धीर है। ऐसे संत-महापुरूषों की सेवा करने से भी प्रेम प्रकट होता है, इसलिए गिरिराज, चित्रकूट, नीलगिरी, गिरनार, कैलाश आदि पावन पर्वतों की सेवा करने का बड़ा महत्व है।
नारद भक्ति सूत्र में आचार्यों के वर्णन को प्रतिपादित करते हुए मुरारी बापू ने कहा कि आचार्यों का वस्त्र,  और आसन ही हरि स्मरण है। बापू ने कहा, कुमार आचार्य, शुकाचार्य, शाण्डिल्य, दर्गाचार्य कोटिल्य , शेषनारायण, उद्धव, आरूणी और स्वयं भगवान विष्णु भक्तिमार्ग के आचार्य हुए। हनुमान भी भक्ति के आचार्य है, जिनमें समस्त 11 प्रकार की आसक्ति निवास करती है। भरत में भी यही सब आसक्तियां लबालब भरी थीं। बापू ने कहा कि भक्ति का आचार्य विशाल होता है, संकीर्ण नहीं। भक्ति मार्ग में आसक्ति के पायदान होते हैं।

बापू ने सम्राट अकबर की अल्लाह के रंग-रूप की जिज्ञासा वाली घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि सूफी संत दादू दयाल ने इस बात का उत्तर अकबर को इस तरह दिया-
इश्क अल्लाह की जात है, इश्क ही रंग।
इश्क अल्लाह की मौजूदगी, इश्क अल्लाह का अंग।
बापू ने बताया कि प्रेम के कारण किया गया श्रवण, कीर्तन, स्मरण, सेवा, वंदन भक्ति में बन जाता है। बापू ने पंथ की राह पकड़कर कट्टरता में जकडे़ रहने वालों से कहा कि राम, अल्लाह, बुद्ध विस्तृत हैं, पूर्ण हैं। उन्हें छोटा मत करो। बापू ने इन्हीं भावों से व्यासपीठ के लिए कहा कि व्यासपीठ विशाल है, इस सिंधू में सभी का प्रवाह है। उन्होंने कहा कि सद्गुरू की मुस्कुराहट से पाप, संताप और परिताप का नाश होता है।

कुरड़ा पंहुचे मुरारी बापू
मुरारी बापू शुक्रवार को मावली तहसील के कुरड़ा गांव में कितावत समाज के प्रताप सिंह के घर पंहुचे और वहा भोजन प्रसाद ग्रहण किया। बापू वहां गांव वालों से भी मिले और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। बापू के सामने गॉव की महिलाओं ने लोक गीत  भी प्रसतुत किये जिसे सुन बापू खुश हुए और राजस्थान की लोकगीतों की सराहना की। बापू के साथ मिराज ग्रुप के सी एम् डी मदन पालीवाल पुत्र मंत्रराज  पालीवाल सहित कही लोग मौजूद थे।
मुरारी बापू ने लिया राम रसोड़े का जायजा
नाथद्वारा । मुरारी बापू ने शुक्रवार रात्रि को मुरारी बापू की राम कथा में आने वाले लोगों की भोजनशाला रामरसोड़े में जा कर भोजन प्रसाद और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बापू राम रसोड़े की इतनी अच्छी व्यवस्था को देखकर अभिभूत हुए।

पार्श्व् गायक केके (कृष्ण कुमार) का कहना है कि गायन के प्रति उनका बचपन से ही रुझान रहा है। मिराज ग्रुप द्वारा आयोजित मुरारी बापू इन नाथद्वारा कार्यक्रम के तहत चल रही सांस्कृतिक संध्या में प्रस्तुति देने पहुंचे के.के. ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मिराज ग्रुप द्वारा  मुरारी बापू के सामने गानों कि प्रस्तुति देने का उन्हें अवसर मिला।

इससे सुखद पल और क्या होगा। नाथद्वारा में वे पहली बार आए हैं और यहां का माहौल को देखकर उनको अपार खुशी हुई।  के.के ने कहा की मैं हर तरह के गाने गाऊं और श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन करना चाहता हूं। के.के. ने भारत जैसे विशाल देश से गायकी की प्रतिभा को सामने लाने व निखारने का एक अच्छा मंच बताया। इंडियन आइडल व सारे गा मा पा जैसी प्रतियोगिताओं में विजेता बनने के बाद युवाओं को फिल्मों में गाने का मौका नहीं मिलने के सवाल के जवाब में के.के. ने कहा कि ऐसा नहीं है। हैसियत के हिसाब से सभी को काम मिलता है। गायन प्रतियोगिता जीत जाना ही आखिरी जीत नहीं होती, उन्हें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए लगातार मेहनत करनी होती है और दम दिखाना पड़ता है। के.के ने मजाकिया लहजे में कहा, मैं संगीतकार बनूंगा, तो सबको काम दूंगा। उन्होंने किशोर दा व आरडी बर्मन को अपना आदर्श बताते के.के. ने कहा कि जगह कोई भी हो, वे गाने का अंदाज और पसंद को नहीं बदलते।

यारों दोस्ती बड़ी हसीं है…
नाथद्वारा त्न अचानक स्टेज पर अंधेरा छा गया। रंग-बिरंगी रोशनियां जगमगा उठीं। रोशनी झिलमिलाते तारों सी नजर आने लगी तभी दिलकश, मदहोश भरी आवाज आई’ यारों दोस्ती बड़ी हसीं है, ये न हो तो आखिर बोलो …. यारों मोहब्बत बंदगी है, ये ना हो तो…. ‘। मदहोश भरी आवाज में बॉलीवुड फिल्मों के पाश्र्वगायक के.के. ने जब अपनी प्रस्तुति अपनी ही एलबम ‘यारों दोस्ती बड़ी हसीं है’ गीत से शुरू की तो 60 हजार से अधिक श्रोताओं के साथ सीधे दोस्ती कर ली। के.के. की आवाज पर, तेज संगीत पर, दोस्ती की पुकार पर, दोस्ती के फलसफे पर सारे झूम-झूम कर कह उठे यारों दोस्ती…। मौका, अवसर, पांडाल वही। मिराज गु्रप का आयोजन मुरारी बापू इन नाथद्वारा के तहत रात्रिकालीन संगीतमय पेशकश। के.के. को बापू का आशीष व श्रोताओं का जबरदस्त साथ मिला। नीली तेज रोशनी, तेज संगीत में जैसे सभी बह रहे थे। बन रहे थे आवारा। दिखा रहे थे आवारापन और के.के. अपने बंजारेपन की मस्ती में फिल्म जिस्म का गीत गाए जा रहे थे ‘आवारपन, बंजारापन, एक जगह है सिने में…। पूरी अदा, पूरी तल्लीनता, मुस्कुराते हुए, काले टी-शर्ट व ब्ल्यू जींस में। सब झूम उठे, गा उठे, लय के साथ करतल व हाथों को हिला-हिला कर के.के. का साथ देते रहे।

सुरों संग क्रतेरी ओर चलेञ्ज

तड़पते दिल को थामते हुए के.के. ने सीटी की धुन से एक नई शुरुआत की। के.के. जैसे श्रोता की ओर चले। फिल्म काइट्स के गीत के साथ ‘ दिल क्यूं ये मेरा शोर करे, इधर-उधर नहीं तेरी ओर चले..’। श्रोता खास कर युवा मदभरी, साफ झरने सी कल-कल आवाज में डूब गए। हर कोई चुप बस जैसे विवेकपूर्ण श्रवण चल रहा हो। फिल्म जिंदगी ना मिलेगी दोबारा के गीत ‘ जिंदगी दो पल की, इंतजार कब तक हम करेंगे भला…से प्रियतमा के इंतजार में प्रेमी की पीड़ा बयां की। (खबर एवं फोटो: उदयपुर इन एवं भास्कर )

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