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The Spiritual Touch

“ममतामयी माँ”

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मदर्स डे पर "ममतामयी माँ"

(Courtsy:Kiran Rajpurohit's Painting)

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Mother’s Day पर बहुत कुछ संजोया “ममतामयी माँ” के लिए…

माँ! क्या कल भी रोई थी तुम

हज़ारों दुखड़े सहती है माँ

“मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई”

Munawwar Rana Poetry

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“मुनव्वर माँ के आगे कभी खुल के मत रोना ,
जहाँ बुनियाद हो वहाँ इतनी नमी अच्छी नहीं होती “
प्रसिद्ध और महान शायर मुनव्वर राना की इस एक पंक्ति में माँ को बहुत ही अच्छे से चित्रित करने की कोशिश हुई है |व्यक्ति के जीवन रुपी ईमारत की बुनियाद माँ है |ईमारत चाहे जैसी भी बने लेकिन सबसे पहले बुनियाद डालनी ही पड़ती है, उसी प्रकार किसी भी जीवन की उत्पत्ति के लिए माँ जैसी बुनियाद आवश्यक है |”माँ “ को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है किन्तु अगर मैं “माँ “ को परिभाषित करने की असफल कोशिश करता हूँ तो पाता हूँ की “ माँ “ वो है जो सिर्फ और सिर्फ देना जानती है|जब किसी बच्चे का जन्म होता है तभी एक माँ का भी जन्म होता है किन्तु माँ बच्चे के जन्म लेने के पहले ही उसकी नाभि के द्वारा उसको श्वांस और भोजन देने लगती है |सबसे पहले जन्म देना ,फिर जीवन बनाये रखने के लिए स्तनपान कराना ,चलना सिखाने के लिए सहारा देना ,हमारे मुख को शब्द देना और संस्कार की वो बुनियाद देना जिसपर हम अपना महल खड़ा करते हैं |अपने भारत देश में धरती और राष्ट्र को भी माँ की संज्ञा दी गई है और यह पूर्णतः सही भी है क्यूंकि धरती ही हमको वो सब कुछ देती है जिसके कारण हमारा जीवन संभव है और राष्ट्र हमारी पहली और आधारभूत पहचान है|शायद हमारे पूर्वजों ने धरती और राष्ट्र को माँ की संज्ञा दे के माँ के महत्व को समझाने की कोशिश की होंगी |

आधुनिकता के इस दौर में मानव मूल्यों का पतन हो रहा है| प्रातः उठकर धरती माँ और जन्मदात्री माँ को प्रणाम करने वाले देश में माँ अपमानित हो रही है |विलासिता में डूबे लोंगो को माता – पिता बोझ लगने लगे हैं |कुछ लोग शायद ये भूल जाते हैं की आज वो जिनको खाना देने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं शायद कभी उसी माँ ने खुद भूखे रहकर अपने हिस्से की रोटी उनको खिला दी होंगी |जो माता –पिता भोजन के लिए आश्रित नहीं है वो शब्द बाणों से घायल किये जा रहे हैं|माँ हमारे मुख से पहला शब्द सुनने को व्याकुल रहती है और बहुत सी कोशिश करके हमको बोलना सिखाती है और आज लोग उसी के द्वारा सिखाए शब्दों का प्रयोग उसको कष्ट पहुचाने मैं कर रहे हैं |जब हम अपनी आजीविका का प्रबंध कर लेते हैं और अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं तो भूल जाते हैं की जब सबसे पहले हम खड़े हुए थे तो माँ ने हमको सहारा दिया होगा |
बहुत सी माँ समय के साथ अपने आप को बदल नहीं पाती और उनके बच्चे जब बड़े होते हैं तो वो उनसे परेशान होकर उनको वृधाश्रम भेजना चाहते हैं |लेकिन कोई भी माँ बच्चे की शैतानी से परेशान होकर उसको किसी आश्रम में भेजना नहीं चाहती मतलब की अपने से दूर नहीं करना चाहती |
मैं दरिया हूँ मुझे अपने किनारे याद रहते हैं,
किसी भी हाल में वो मुझसे गाफिल हो नहीं सकता,
खुदा है वो उसे कीडे-मकोडे याद रहते हैं,
खुदा ने ये सिफत दुनिया की हर एक माँ को बक्शी है
, के वो पागल भी हो जाये तो बेटे याद रहते हैं | – मुनव्वर राना
माँ अगर बीमार हो जाये और किसी को एक रात जागना पड़े माँ की सेवा के लिए तो उसको बड़ा कष्ट होता है लेकिन वो ये भूल जाता है की पता नहीं कितनी रातें माँ उसके लिए जागी होंगी |वृद्ध माँ को सर्दी की रातों में कम्मल उढ़ाना भूल जाने वाले बेटे ये भूल जाते हैं कि उनको सर्दी से बचाने के लिए उसी माँ ने कितनी रातें उनके द्वारा गीले किये गये बिस्तर पर काटी होंगी |
माँ अपने बच्चे के लिए अपनी आखरी स्वांस तक प्रयत्न करती है और दुनिया का सबसे निम्न कोटि का काम भी करने को तैयार हो सकती है |एक माँ चार चार बच्चों का पालन पोषण कर सकती है लेकिन चार बच्चों से एक माँ का पालन मुश्किल हो जाता है |
जब व्यक्ति जीवन में सबसे जादा हताश होता है तो सिर्फ एक माँ ही होती है जिसके पास जाने पर उसको सिर्फ और सिर्फ सकारात्मक स्पर्श और आत्मीयता मिलती है |जो माँ सिर्फ हमारे जन्म के समय को छोड़ हमको कभी भी रोता हुआ नहीं देख सकती उसकी आँखों में हम आंसू क्यूँ लायें|
माँ के ऋण को हम कभी नहीं उतार सकते |जो लोग माँ के द्वारा किये गये असाधारण कार्यों को महज कर्तव्य और धर्म कि संज्ञा देते हैं उनसे मेरा विनम्र निवेदन है कि वो भी सिर्फ अपना कर्तव्य और धर्म निभाते हुए अपनी माँ कि सेवा करते रहें |मैं भी अपने शब्दों को सफल करने का सार्थक प्रयत्न करूँगा |
एक माँ ही है जो हर हालात में अपने बच्चे के लिए दुआ करती है |बिना मांगे मिली इस अनमोल मुराद की सार्थकता बनाये रखिये |अन्त में मुनव्वर राना जी की ही दो पंक्तियाँ दुनिया की सभी माँ के लिए श्रद्धा सुमन के रूप में –
लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती

(सत्यव्रत शुक्ल )

One Comment

  1. Dinesh Gehlot

    Mere liye jaagna aur
    darwaaje ki aur taakna
    mujhse kahti hai jhuth
    ki wo raat me soti hai
    meri tarakki ki karke dua..
    meri yaad me bhi roti hai..
    maa tere aankh se gira
    ek ansoo bhi moti hai..
    karne mere sapne ko pura ..
    sapno ko wo khoti hai..
    jhulsati dhoop me bhi wo
    jese saawan ko boti hai
    itna tyaag to bas yahi krti hai
    kyonki maa to maa hoti hai

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