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The Spiritual Touch

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॥ रुद्राष्टकम् ॥ (भावार्थ सहित )

  नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।   RELATED ARTICLES एक ज्योतिर्लिंग ऐसा जहाँ शिव लिंग दिखाई नहीं देता अमरनाथ यात्रा 2012: रजिस्ट्रेशन आरम्भ केदार नाथ का सफर 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा उज्जयिनी के राजा: दक्षिण मुखी महाकाल काशी मोक्ष नगरी: विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग ॥ शिव तांडव स्तोत्रम् ॥ ************************************************ नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं। निजं [...]

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॥ निर्वाण षष्टकं ॥ (अनुवाद सहित )

मनोबुद्ध्यहंकारचित्तानि नाहं, न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योमभूमिर्न तेजो न वायुः, चिदानंदरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥ (१) भावार्थ : मैं मन, बुद्धि, अहंकार और स्मृति नहीं हूँ, न मैं कान, जिह्वा, नाक और आँख हूँ, न मैं आकाश, भूमि, तेज और वायु ही हूँ, मैं चैतन्य रूप हूँ, आनंद हूँ, शिव हूँ, शिव हूँ। [...]

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॥ श्रीकृष्ण स्तुति ॥

श्री कृष्ण चन्द्र कृपालु भजमन, नन्द नन्दन सुन्दरम्। अशरण शरण भव भय हरण, आनन्द घन राधा वरम्॥ सिर मोर मुकुट विचित्र मणिमय, मकर कुण्डल धारिणम्। मुख चन्द्र द्विति नख चन्द्र द्विति, पुष्पित निकुंजविहारिणम्॥ मुस्कान मुनि मन मोहिनी, चितवन चपल वपु नटवरम्। वन माल ललित कपोल मृदु, अधरन मधुर मुरली धरम्॥ वृषुभान नन्दिनि वामदिशि, शोभित सुभग [...]

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॥श्री कृष्ण कृपा-कटाक्ष स्त्रोत्र ॥

भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं, स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम्। सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं, अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम्॥ (१) मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं, विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम्। करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं, महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णावारणम्॥ (२) कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं, व्रजांगनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम्। यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया, युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम्॥ (३) सदैव पादपंकजं मदीय मानसे निजं, दधानमुक्तमालकं नमामि नन्दबालकम्। समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं, समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम्॥ (४) भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं, यशोमतीकिशोरकं [...]

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श्री गोविन्द-दामोदर स्तोत्रम्

करारविन्देन पदार्विन्दं, मुखार्विन्दे विनिवेशयन्तम्। वटस्य पत्रस्य पुटेशयानं, बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि॥ (१) श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव। जिव्हे पिबस्वा मृतमेव देव, गोविन्द दामोदर माधवेति॥ (२) विक्रेतुकामाखिल गोपकन्या, मुरारी पादार्पित चित्तवृतिः। दध्यादिकं मोहावशादवोचद्, गोविन्द दामोदर माधवेति॥ (३) गृहे-गृहे गोपवधू कदम्बा:, सर्वे मिलित्वा समवाप्ययोगम्। पुण्यानि नामानि पठन्ति नित्यं, गोविन्द दामोदर माधवेति॥ (४) सुखं [...]

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॥ हनुमानाष्टकम् ॥

बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो, ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो। देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो, को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥ (१) भावार्थ : हे हनुमान जी! आप जब बालक थे तब आपने [...]

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॥ हनुमान स्तुति ॥

  ॥ दोहा ॥ निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान । तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान॥ ॥ चौपाई ॥ जय हनुमन्त सन्त हितकारी, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज विलम्ब न कीजै, आतुर दौरि महा सुख दीजै॥ जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा, सुरसा बदन पैठि विस्तारा॥ आगे जाई लंकिनी [...]

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हनुमान चालीसा (अनुवाद सहित )

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन कुमार। बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥ भावार्थ : मैं सदगुरु के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके, श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन [...]

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गुरुष्टकम्

शरीरं सुरुपं तथा वा कलत्रं यशश्चारू चित्रं धनं मेरुतुल्यम्। मनश्चेन्न लग्नं गुरोरंघ्रिपद्मे ततः किं ततः किं ततः किं ततः किम्॥ (1) भावार्थ : जिस व्यक्ति का शरीर सुन्दर हो, पत्नी भी खूबसूरत हो, कीर्ति का चारों दिशाओं में विस्तार हो, मेरु पर्वत के समान अनन्त धन हो, लेकिन गुरु के श्रीचरणों में यदि मन की [...]

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गोपी गीत

कस्तूरी तिलकं ललाट पटले वक्ष: स्थले कौस्तुभं। नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणु: करे कंकणं॥ भावार्थ:- हे श्रीकृष्ण! आपके मस्तक पर कस्तूरी तिलक सुशोभित है। आपके वक्ष पर देदीप्यमान कौस्तुभ मणि विराजित है, आपने नाक में सुंदर मोती पहना हुआ है, आपके हाथ में बांसुरी है और कलाई में आपने कंगन धारण किया हुआ है। सर्वांगे हरि [...]

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दक्षिणामूर्ति स्तोत्रं

विश्वं दर्पणदृश्यमाननगरीतुल्यं निजान्तर्गतम्, पश्यन्नात्मनि मायया बहिरिवोद्भूतं यदा निद्रया। यः साक्षात्कुरुते प्रबोधसमये स्वात्मानमेवाद्वयम्, तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये॥ (१) भावार्थ : यह विश्व दर्पण में दिखाई देने वाली नगरी के समान है (अवास्तविक है), स्वयं के भीतर है, मायावश आत्मा ही बाहर प्रकट हुआ सा दिखता है जैसे नींद में अपने अन्दर देखा गया स्वप्न बाहर [...]

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चतुः श्लोकी

  सर्वदा सर्वभावेन भजनीयो व्रजाधिपः। स्वस्यायमेव धर्मो हि नान्यः क्वापि कदाचन॥ (१) भावार्थ : प्रत्येक क्षण सम्पूर्ण मन-भाव से ब्रज के अधिपति भगवान श्रीकृष्ण का ही स्मरण करना चाहिए, मनुष्य के लिए इसके अतिरिक्त और कुछ भी कर्म नहीं है, केवल यही एक मात्र धर्म है। (१) एवं सदा स्वकर्तव्यं स्वयमेव करिष्यति। प्रभुः सर्व समर्थो [...]

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अत्रि स्तुति

नमामि भक्त वत्सलं, कृपालु शील कोमलं। भजामि ते पदांबुजं, अकामिनां स्वधामदं॥ (१) भावार्थ : हे प्रभु! आप भक्तों को शरण देने वाले है, आप सभी पर कृपा करने वाले है, आप अत्यंत कोमल स्वभाव वाले है, मैं आपको नमन करता हूँ। हे प्रभु! आप कामना-रहित जीवों को अपना परम-धाम प्रदान करने वाले है, मैं आपके [...]

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॥ श्री नन्दकुमाराष्टकं ॥

सुन्दर गोपालं उरवनमालं नयन विशालं दुःख हरं, वृन्दावन चन्द्रं आनंदकंदं परमानन्दं धरणिधरं। वल्लभ घनश्यामं पूरण कामं अत्यभिरामं प्रीतिकरं, भज नंद कुमारं सर्वसुख सारं तत्वविचारं ब्रह्मपरम॥ (१) सुन्दरवारिज वदनं निर्जितमदनं आनन्दसदनं मुकुटधरं, गुंजाकृतिहारं विपिनविहारं परमोदारं चीरहरम। वल्लभ पटपीतं कृतउपवीतं करनवनीतं विबुधवरं, भज नंद कुमारं सर्वसुख सारं तत्वविचारं ब्रह्मपरम॥ (२) शोभित मुख धूलं यमुना कूलं निपट अतूलं [...]

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उदयपुर का गणगौर महोत्सव (फोटो)

उदयपुर के प्रसिद्द गणगौर महोत्सव, जिसे मेवाड़ महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, की रंगारंग शुरुआत 25 मार्च 2012 की शाम हुई. इस बार महोत्सव में कुल चौदह समाजों की गणगौर शामिल हुई. सभी गणगौर का जगदीश चौक में मिलन हुआ. तत्पश्चात जुलूस के रूप में गणगौर और ईसर पिछोला झील किनारे गणगौर [...]

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सुन्दरकाण्ड: सम्पूर्ण मूल पाठ

श्लोक: शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् । रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूड़ामणिम्।।1।। नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा। भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मे कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च।।2।। अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।3।। जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए।। तब लगि मोहि [...]

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वज्रासन से कामोत्तजना पर नियंत्रण / Vajrasana (Thunder Posture)

  वज्रासन में बैठने पर हमारे पाचनतंत्र को बहुत लाभ मिलता है। और ऐसे बैठने पर कामोत्तजना पर नियंत्रण होता है। जब आप यूँ घुटने मोड़कर नितम्बों को पाँव की एड़ी पर टिकाकर बैठते हैं तो शरीर में वज्र नाम की एक नाड़ी है, जिस पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। और यही वज्र जननांगों, [...]

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बड़ा होता है पालनहार: शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज

भगवान कृष्ण को देवकी ने जन्म दिया था, लेकिन उन्हें पाल-पोस कर बडा किया यशोदा मां ने। माना जाता है कि जन्म देने वाले से पालने वाला बडा होता है। यशोदा ने श्रीकृष्ण को जन्म नहीं दिया था। पालन-पोषण किया था। उन्हें संस्कार देने का पूरा प्रयत्न किया था। मां से भी बढकर। यह उनका [...]

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साईं का साधना स्थल- शिरडी

महाराष्ट्र के छोटे से गाँव शिरडी के बीचो बीच स्थित साई बाबा का साधना क्षेत्र और समाधि मंदिर श्रद्धा का केन्द्र बना हज़ारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। भक्तों की बढ़ती भीड़ और मेले में लोग इस विश्वास से शामिल होते हैं कि समाधि मंदिर में माथा टेकने से मुँह माँगी मुरादें पूरी [...]

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Gayatri Ma Upasana

गायत्री उपासना विधि :शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ

गायत्री उपासना हम सबके लिए अनिवार्य ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् । गायत्री महामंत्र सनातन धर्म का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है जिसकी महत्ता ॐ के लगभग बराबर मानी जाती है। यह यजुर्वेद के मंत्र ॐ भूर्भुवः स्वः और ऋग्वेद के छंद 3.62.10 के मेल से बना है। इस मंत्र [...]

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ram dayal ji maharaj

बधाई संदेश:आचार्य राम दयाल महाराज

राम जी राम अंतर्राष्ट्रीय  रामस्नेही सम्प्रदाय की ओर से सत्संग लाइव के उज्जवल भविष्य की मंगल कामना, समाज और राष्ट्र को नव-दिशा देने में मंगल कार्य करें, युवा अपने विचारों को सदैव उच्च रखे. माता-पिता, गुरुजनों, वरिष्ठ जानो का सन्मान करें. और सबसे बड़ी बात, जीवन में सदा मुस्कुराते हुए झंझावातों को सहन करें. रामजी [...]

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Shiva

आरती- शिव जी

जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा | ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… एकानन चतुरानन पंचांनन राजे | हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें | तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी | त्रिपुरारी, [...]

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ShaniMaharaj

आरती- शनि देव

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥ श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय.॥ क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय.॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय.॥ देव [...]

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tulja bawani temple

मराठा शक्ति पीठ: माँ तुलजा भवानी

  Navratri Pooja, Customs, Aarti & All Navratri Pooja Vidhi देवी कवच / चण्डी कवच 51 पीठों में महापीठ : कामाख्या शक्तिपीठ मराठा शक्ति पीठ: माँ तुलजा भवानी जहाँ दीपक से काजल नहीं,केसर बनती है : आई माता जिस मंदिर में पाकिस्तान के छक्के छूट गए : तनोट माता चूहों वाली माता : करणी माता, [...]

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चौघड़िया मुहुर्त ज्योतिष

चौघडिया मूहुर्त क्या है तेजी से भागते, बदलते समय ने ज्योतिष के मूहुर्त को भी बदल के रख दिया है. आज झटपट मूहुर्त का चलन है. मूहुर्तों की इसी श्रेणी में चौघडिया मूहुर्त  का नाम आता है. इस मूहुर्त को गुजरात व भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक प्रयोग में लाया जाता है. चौघडिया मूहुर्त [...]

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