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पावागढ़: मां काली शक्तिपीठ

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गुजरात की प्राचीन राजधानी चंपानेर से कुछ दूरी पर पावागढ़ पहाड़ी के शिखर पर बना मां काली का यह शक्ति पीठ भारत के प्रमुख पवित्र धामों में से एक है. काली माता मंदिर माँ के शक्ति पीठों में अति पावन स्थल माना जाता है. यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन होता रहता है.

दूर-दूर से आए भक्त लोग मां के दर्शनों को पाकर जीवन के सभी दुखों को भूल जाते हैं व माता की भक्ति में रम जाते हैं. काली माता का यह प्रसिद्ध मंदिर भक्तों के विश्वास व उनकी आस्था का स्थान है. मान्यता है की यहां देवी के वक्षस्थल गिरे थे.

म्हारी पावागढ़ वाली माँ काली

पावागढ़

पावागढ़ शक्तिपीठ कथा |

शक्ति पीठ वह स्थल कहलाए जहां-जहां पर देवी सती के अंग गिरे थे मां के वक्षस्थल का हिस्सा यहां गिरने के कारण ही यह स्थान पवित्र स्थानों एवं शक्ति पीठों में गिना जाने लगा. शिव पुराण एवं अन्य पौराणिक ग्रथों में इस कथा का उल्लेख मिलता है कि किस प्रकार पिता दक्ष द्वारा पति के अपमान से त्रस्त हुई देवी सती अपने आप को यज्ञ की अग्नि में जला देती है.

और जब भगवान शिव को इस घटना के बारे में पता चलता है तो वह चारों ओर त्राही मचा देते हैं ओर सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड में भटकते रहते हैं. इस दौरान जहां भी सती के अंग गिरे वह स्थान शक्ति पीठों के रूप में सामने आया इसी प्रकार यह पावागढ़ भी एक बहुत पूजनीय सिद्ध स्थल है.

मंदिर में भक्तों की अच्छी ख़ासी भीड़ देखी जा सकती है. मंदिर में मां काली की एक दक्षिण मुखी प्रतिमा विराजमान है जिसके कारण यहां तांत्रिक पूजा का विधान देखा जा सकता है. अत: तंत्र से संबंधित तांत्रिक कार्य यहां पर संपन्न किए जाते हैं. तांत्रिकों का भी यह मुख्य स्थल हैं जहां वे लोग आकर तंत्र साधना किया करते हैं तथा मां के आशीर्वाद को प्राप्त करते हैं.
पावागढ़ शक्तिपीठ महत्व |

इस स्थान के बारे में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी देखे जा सकते हैं. माना जाता है की इस पहाड़ी पर कभी विश्वामित्र जी का वास था और उन्होंने इस स्थान को अपनी तपोस्थली बनाया था. कहा जता है की विश्वामित्र जी ने यहां पर माँ काली की उपासना की थी और वषों तक मां की तपस्या कर माँ को प्रसन्न किया.

तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया माँ की तपस्या करते हुए उन्होंने यहां पर माँ काली की प्रतिमा की स्थापना भी की और वर्तमान में जो मूर्ति मंदिर में स्थापित है वह वही प्रतिमा है. इसी के साथ यहां पर बहने वाली एक नदी को उन्हीं के नाम से पुकारा जाता है जो विश्वामित्री कहलाती है.
पावागढ़ कालिका शक्तिपीठ मंदिर |

माँ काली के इस मंदिर के प्रति लोगों कि अपार श्रद्धा देखी जा सकती है. भक्तों का मानना है की माँ के दर्शनों को प्राप्त करके सभी के कष्ट दूर हो जाते हैं ओर मन की मुरादें पूर्ण होती है. नवरात्र समय मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. जगह जगह पर किर्तन व भंडारों का आयोजन किया जाता है. पूरे मंदिर को बहुत ही सुंदर तरह से सजाया जाता है मंदिर रोशनी से सरोबार रहता है.

प्राचीन समय में यहां का मार्ग बहुत ही दुर्गम रास्तों से भरा रहता था चारों ओर से खाइयों से घिरे रहने की वजह से यहां पर हवा का दबाव भी बहुत तेज होता था इस कारण से यह स्थान पावागढ़ यानी के ऐसा स्थान जहां पवन का वास हो कहा गया. परंतु आज स्थिती काफी बेहतर है और हजारों लोग प्रति वर्ष यहां माँ के दर्शनों हेतु आते रहते हैं तथा माँ काली की कृपा के पात्र बनते हैं.
पावागढ़ कालिका मंदिर महत्व |

माँ काली का यह मंदिर गुजरात की प्राचीन राजधानी चंपानेर के नज़दीक में स्थित है. पावागढ़ का यह काली मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है जहां इस दुर्गम मंदिर की चढ़ाई करना बहुत ही थका देने वाला एवं कठिन होता है.

परंतु इस क्षेत्र के मनोरम दृश्यों को देखते हुए यह थकान कब गायब हो जाती है इस बात का एहसास भी नहीं होता वर्तमान समय में यहां मंदिर में पहुँचने के लिए रोप-वे सुविधा का इंतज़ाम भी कर दिया गया है जिसके द्वारा इस ऊँचे पर्वत शिखर मंदिर में आसानी से पहुँचा जा सकता है.

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