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कुछ प्रमुख धर्म और उनकी मान्यता

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संसार में देखा जाए तो अनेक धर्मों में मुख्यतः नौ धर्म प्रमुख हैं। यह हैं- हिन्दु, बौद्ध, ईसाई, यहूदी, ताओ, इस्लाम, षिंटो, कनफ्यूसियस और जुरथ्रस्त अथवा पारसी। अपने-अपने मन, बुद्धि, विवेक, संस्कार तथा परम्पराओं आदि को लेकर उनमें अलग-अलग मत हैं। यदि बौद्धिकता से स्वाघ्याय और मनन किया जाए तो प्रत्येक धर्म में कुछ बातें बिल्कुल ही सामान्य हैं अर्थात प्रत्येक धर्म मानता है कि:
प्रमुख धर्म और उनकी मान्यता
कोई एक शक्ति अवष्य है जो मनुष्य से अधिक शक्तिषाली है।

इस शक्ति की सब पूजा करते हैं।

इसकी पूजा प्रार्थना के लिए उत्सव करते हंै।

इस उपासना से संबंधित प्रत्येक स्थान तथा उसके इतिहास को पवित्र मानते हंै।

सब मानते हैं कि धर्म पालन करने से मृत्यु के बाद का जीवन और वर्तमान जीवन सुन्दर बन जाएगा।

शुद्ध आचरण से मनुष्य उस शक्ति अर्थात ईष्वर को प्रसन्न कर सकता है।

हर आदमी के अच्छे-बुरे कर्मों का संचय होता है।

जितने भी धर्म हैं उनकी 2 श्रेणियाॅ हैं- कर्म प्रधान, जैसे हिन्दु धर्म के अंतर्गत

जैन धर्म, बौध धर्म तथा सिख धर्म और विष्वास अथवा आस्था प्रधान जैसे इस्लाम धर्म, यहूदी धर्म तथा ईसाई धर्म।

कर्म प्रधान हिन्दु धर्म के अंतर्गत मुख्यतः पांच सम्प्रदाय हैं- वैष्णव, सौर, शाक्त, शैव और गाणपत्य। सब धर्म अपनी-अपनी रीति, परम्परा और विवेक के अनुसार पूजा पाठ, उत्सव, सामूहिक रुप से एकत्र होना आदि का अनुपालन करते हैं। सिख धर्म वाले श्रद्धालु शब्द वाणी का प्रारम्भ ‘इक्क औंकार सिरी सदगुरु परसादि’ से करते हैं। शब्द वाणी के गीत गाकर कड़ाह प्रसाद का कुणका बरताकर वाहे गुरु की फतह मानते हैं। इसका भावार्थ है – वा – वासुदेव, ह – हरि, गु – गोविन्द, रु – राम। सिख धर्म के प्रवर्तक श्री गुरु नानक देव जी ने गुरुवाणी- गुरुग्रंथ साहब में कहा है- ‘नानक दुखिया सब संसार, तेजन सुखी जे नाम अधार।’ सिख धर्म के दस गुरु हैं- गुरु नानक देव, गुरु अंगद देव, गुरु अमर दास, गुरु राम दास, गुरु अर्जुन देव, गुरु हर गोविंद, गुरु हर राय, गुरु हरकिषन, गुरु तेग बहादुर तथा गुरु गोविन्द सिंह।

जैन धर्म का मूल मंत्र है- ‘णमों अरि हंताणम् णमों सिद्धाणम।’ अपने तीर्थंकरों की कथा सुनकर अथवा उनकी प्रतिमाओं के दर्षन करके वह अपने को धन्य मानते हैं। जैन धर्मों के प्रमुख 24 तीर्थंकर हैं- आदिदेव अर्थात ऋषभदेव, अजितनाथ, संभव नाथ, अभिनंदन नाथ, सुमथ नाथ, पदमप्रभु जी, सुपार्षुनाथ, चंद्रप्रभु, पुष्पदंत, शीतलनाथ, श्रयांषनाथ बांसपूज्य, विमलनाथ, अनंत नाथ , धर्मनाथ, शान्तिनाथ, कुंथ नाथ, अरहनाथ, मल्लिनाथ, मुनि सुव्रतनाथ, नमिनाथ, नेमिनाथ, पारसनाथ, महावीर स्वामी जी (महावीर जी के सामान्यतः पांच नाम प्रचलित हैं-वीर, अति वीर, सन्मति, वर्धमान और महावीर)। जैन धर्म के प्रवर्तक श्री ऋषभदेव जी तथा श्री अरिष्टनेमि दोनों हैं। देानों ही जड़ तथा चेतन को तत्व मानते हैं। इसी क्रम में जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर श्री महावीर जी हैं। इस धर्म के जैन श्रावक ‘अनादि णमोकार मंत्र का जप-ध्यान करते हैं।’ इस धर्म के भगवान ‘जिन सर्वज्ञ’ अर्थात जिनागम हंै।

बौद्ध धर्म का मूल मंत्र है ‘ओं मणि पद्मे हुम्’ इस धर्म के अनुयायी भगवान बुद्ध का स्मरण करते हैं।

मुस्लिम धर्मावलंवी अल्लाह- ‘अलिफ, लाभ, मीम’ से प्रारम्भ करते हैं। इस धर्म के प्रवर्तकाचार्य पैगंबर मौहम्मद साहब ने क़ुरान में कहा है- ‘अल्लाह के महान नाम को गाओ।’ यह प्रसिद्ध नाम अर्थात कलमा है- ला इलाह इल्लिलाह। यह पांच बार दिन में नमाज़ पढ़ते हैं। खुदा को सज़दा करते हैं। इसको वह एक अच्छे मौमिन की पहचान मानते हैं। वह मानते हैं – इस दुनिया में फसाद बरपा न करो (अर्दि – 7/56)। नहीं है कोई इबादत के लायक अल्लाह के सिवा। अल्लाह को तुम ऐसे याद करो जैसे तुम याद करते हो अपने बाप-दादा को, बल्कि उससे से भी बहुत ज्यादा (कु़रान म. 2.200)। किसी पर ज्यादती न करो (कु़. म.2.190)। न तो पशुओं का मांस और न तो उनका रक्त ईष्वर तक पहुंचाता है (हदीस)। रसूलउल्लाह साहब ने पशुओं को चीरने या पहचानने के लिए किसी गर्म चीज़ से उन पर निषान लगाने के लिए सख्त मना कर दिया। एक बार एक गधे पर ऐसा चिन्ह देखकर आपने फरमाया कि जिसने भी ये किया है, वह खुदा के आषीर्वाद से वंचित रहेगा। इस्लाम धर्म में पशुओं के अधिकारों को बहुत महत्व दिया गया है। उनको आदेष दिया गया है कि उनके अधिकारों की रक्षा करो । हर जीवित प्राणी पर सहानुभूति करो, उसका पुण्य प्रताप तुम्हें मिलेगा। सभी प्राणियों पर दया करो अर्थात दुनिया वालों पर तुम रहम करो, क्योंकि खुदा ने तुम पर बड़ी मेहरबानी की है (हदीस)। जानवारों को मारना और खेत फसलों को तबाह करना, ज़मीन में ख़राबी फैलाना आदि अल्लाह पसंद नहीं करता (क़ु.श.)। जीव को जीने का पूरा हक़ है। जो भी खुदा की पैदा की गयी चीजा़ें, प्राणियों के साथ रहम करता है, वह अपने पर रहम करता है। अतः सभी प्राणियों पर दया करो (कु़.म.)। पाक नबी ने मक्का-मदीना में ऊंट तथा भेड़ों की कुब्क और पूंछ काटना न केवल बंद करवाया था बल्कि ऐसे कृत्य को हराम क़रार दिया था। सभी प्रकार की पशु हिंसा पाप है (दीन-ऐ-इलाही)। इस्लाम जानवरों की क़ुर्बानी नहीं सिखाता बल्कि वह सबक देता है कि सूफी फ़कीरों के नक्षे कदम पर चलो तथा प्यार, मुहब्बत, रहम, करुणा और ममत्व को जीवन का आदर्ष बनाओ। इस्लाम धर्म के प्रवर्तकाचार्य पैगंबर मौहम्मद साहब ने कुरान शरीफ में कहा है- ‘अल्लाह के महान नाम को गाओ।’ यह प्रतिदिन का आवष्यक कर्म है वह नाम है-ला इलाह इल्लिलाह- जो कि एक प्रसिद्ध क़लमा है। हिन्दु मत में अनेक मुस्लिम संत प्रसिद्ध हुए हैं जैसे कबीर, रहीम, रसखान, दरिया, बुल्ले, गुलाम रसूल, जुल्फिकार, अली जाफर, मीर, चुन्ना मिंया आदि।

आर्य समाज बहुत अच्छा धर्म है पर आज आर्य समाजी दूसरे को दस्यु कहना सिखाता है- यह धर्म-संगत कदापि नहीं है। जबकि आर्य जाति का अर्थ है अधिक से अधिक सवर्ण जाति। आर्य समाजी उस्तरा, कुषा, पटेला, अंचल, शीषा, छाता, लाठी, आदि की उपासना करते हैं। चांद को अघ्र्य देते हैं। पृथ्वी को अक्षत और चंदन से पूजते हैं। एक विषिष्ट मुद्रा में बैठकर जो अंधकार में दिखता है, उसे ही निराकार बाबा जानकर उपासना की पराकाष्ठा तक पहुचते हैं। आर्य समाजी कहते हैं कि जब आवष्यकता पड़ती है, तब परमात्मा स्वामी दयानंद सरीखे किसी महापुरुष को भेेजते हैं।

ईसाई धर्म को मानने वाले मरियम, ईसा मसीह, तथा क्रास की चर्च में पूजा इबादत करते हैं। चर्च में घुटने टेक कर दुआ मांगते हैं- ऐ खुदा, ऐ आसमानी बाप, मुझे इम्तहान में न डाल, मुझे बुराईयों से बचा, मेरे गुनाह माफ कर, बीमारों को चंगा कर, तेरा लाख-लाख शुक्र है जो तूने मुझे आज की रोटी बख्शी और मुझे कल की रोटी बख्श। वह मानते हैं कि उपवास व्रत दिखाने के लिए न हो, ईष्वर के प्रति सच्चाई हो- बाईबिल- 6/18-18।

पारसी धर्म के प्रवर्तक जुरथ्रस्त ने ‘ज़ेन्दा वेस्ता’ नामक ग्रंथ में पांच प्रकार के वैद्यों का उल्लेख किया है जिसमें सच्चा वैद्य उसे कहा है जो रोग मिटाने के लिए ईष्वर के नाम पर ही भरोसा करते हैं। उनका कहना है, ‘मैं दवा करता हॅू और ईष्वर (अहुर माज़दा अर्थात जगत कर्ता) चंगा करता है।’ वह मानते हैं कि मृत्यु के बाद भी उनका पार्थिव शरीर किसी के काम आए।

यहूदी धर्म के आदि पैगम्बर हजरत इब्राहिम ने पुरानी बाईबिल (वसक जमेजूंदज) तौरात में यहोबा को उपास्य देव माना हंै। अतः उसका ही नाम वह स्मरण करते हैंै। यहोवा का अर्थ है- वही है वह। सोऽहमास्मि का मिलता-जुलता रुप इसी भाव का माना जा सकता है। यहूदी धर्म कहता है- जो यहोवा की विधि पर चलता हो, यहोवा के नियमों का पालन करता हो, जो सच्चा हो और सच्चे कार्य करता हो, वही धर्मात्मा है (यहूदी यहेज केल 18/5-4)।

राधास्वामी मत वाले कानों में उंगलीं डालकर हृदय चक्र की ध्वनि सुनते हैं।

हिन्दु धर्म में मान्यता है- ‘मनुष्य की अंतः चेतना प्रकृति और पुरुष, दोनों के संयोग से निर्मित है। अंतःकरण चतुष्टय ब्रह्मा के चार मुख-ब्रह्म, ईष, विष्णु और भगवान से परे एक सूक्ष्म चेतना केन्द्र है, इसको ही आत्मा कहा गया है।’ दया, प्रेम, उदारता, त्याग, सेवा, दान, ज्ञान, विवेक की शांतिमय इच्छा तरंगे आत्मा से ही उद्भूत होती हैं। वेदान्त दर्षन में भी तत्वमसि, सोऽहम्, षिवोऽहम्, अयमात्मा ब्रह्म आदि सूत्रों का ही अभिप्राय है कि आत्मा ही ब्रह्म है। आराध्य ब्रह्म के दो रुप माने गये हैं- निर्गुण तथा सगुण।

भारतीय अध्यात्म में त्रिवाद अर्थात अद्वैतवाद, द्वैतवाद और विषिष्टाद्वैतवाद की परंपरा है। अद्वैतवाद परमात्मा की सत्ता को ही एकमात्र आदि सत्ता के रुप में स्वीकार करता है। द्वैतवाद सांख्यवादी प्रकृति और पुरुष दोनों को अनादि मानता हैं। विष्ष्टिाद्वैत वाद जीवात्मा को परमात्मा के आधीन मानता है।

स्मृति प्रधान, यज्ञ प्रधान, संगीत प्रधान तथा तंत्र-साधना प्रधान तत्व कारक चार वेद क्रमषः ऋग्वेद, युजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद, पुराण, संहिताऐं, ब्राह्मण गं्रथ, आरव्यक, स्मृतियाॅ, रामायण और गीता हिन्दू धर्म के प्राण हैं। भारतीय हिन्दू संस्कृति और वांगमय के अनुरुप संत, महापुरुष और ऋषियों ने अलग-अलग धर्म, मत, पंथ आदि प्रतिपादित किए जो हिन्दु तथा अहिन्दु अपने-अपने बुद्धि-विवेक से अपना रहे। सनातन धर्म में देखा जाए तो नवनाद भावना अधिक सत्य है। अनाहत नाद में वृत्तिषून्य हो जाती है तथा नौ तरह के ध्वनिनाद सुनाई देने लगते हैं – कांस (झांझ), श्रंगनाद, बांसुरी, वीणा, घण्टा, शंख, दुन्दुभि और मेघगर्जन।

जो कोई भी धर्म है, जो कुछ भी अध्यात्मवाद से जुड़ा हुआ है अथवा जो कुछ भी है – धर्म-कर्म, पूजा-पाठ, पठन-पाठन, स्वाध्याय-मनन और गुनन आदि अंततः वहाॅ एक बात अवष्य निकलकर सामने आती है:

चार वेद, छः शास्त्र में,
बात मिली हैं दोय।
सुख दीने सुख होत है,
दुःख दीने दुःख होय।।

(courtsy: janokti.com)

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