मराठा शक्ति पीठ: माँ तुलजा भवानी

ma tulja bhawani

 

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देवी कवच / चण्डी कवच

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मराठा शक्ति पीठ: माँ तुलजा भवानी

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महाराष्ट्र के शहरों में से एक में स्थित उस्मानाबाद जिला जहाँ पर स्थापित है मां तुलजा भवानी जी का भव्य मंदिर. यह मंदिर देवी के भक्तों का अनुपम धाम हैं जहाँ आकर भक्त आत्मिक शांति एवं शक्ति को पाता है तथा सभी तकलीफों से मुक्त होता है. माँ तुलजा भवानी का यह मंदिर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध स्थानों गिना जाता है जहाँ का आध्यात्मिक वातावरण सभी में भक्ति की अनुभूति का संचार करता है.
तुलजा भवानी मंदिर स्थित है तुलजापुर में जिसे लोग शिवाजी के काल समय से जोड़ते हैं कहा जाता है कि तुलजा भवानी छत्रपति शिवाजी की कुलदेवी थी और जिनके आशिर्वाद को पाकर शिवाजी ने सभी दुशमनों को मार भगाया था तथा अपना एक सशक्त शासन स्थापित किया. आज भी यहाँ के लोगों में देवी तुलजा भवानी कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं  तुलजा भवानी महाराष्ट्र के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है. भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से भी एक मानी जाती है.
भवानी महाराष्ट्र के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है. भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से भी एक मानी जाती है.

tulja bhawani
तुलजा भवानी कथा
माँ तुलजा भवानी जिनका स्वरूप भक्तों को सुख एवं समृद्धि प्रदान करता है जिनके दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट एवं कलेश दूर हो जाते हैं उस माँ के रूप वर्णन को धार्मिक ग्रंथों में विस्तार पूर्वक दर्शाया गया है. माता के इस रूप के वर्णन में एक कथा बहुत ही प्रचलित है जिसके अनुसार कहा जाता है जाता है कि कृतयुग में करदम नाम के एक ब्राह्मण हुआ करते थे जिन्हें अनुभूति नामक सुंदर एवं सुशील पत्नी का साथ प्राप्त हुआ.

करदम की मृत्यु पश्चात उनकी पत्नि अनुभूति ने सती होना चाहा परंतु वह गर्भवती थी इस कारण उन्हें अपने इस विचार का त्याग करना पडा़ तथा उसने मंदाकिनी नदी के किनारे को अपना निवास स्थान बना लिया. वह नियमित रूप नदी के किनारे भगवान की अराधना करती थी इस दौरान वह तपस्या में लीन रहती हैं तभी एक बार कूकर नामक राजा वहाँ से गुज़र रहा होता है तथा अनुभूति के सौंदर्य पर मोहित हो जाता है.

ध्यान मग्न अनुभूति इस घटना से अनभिज्ञ होती है तभी वह दुराचारी राजा अनुभूति के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास करता है. अनुभूति अपने को बचाने के बहुत प्रयास करती है तथा माँ भवानी से याचना करती है उसकी पुकार सुन माँ वहाँ पर अवतरित होती हैं तथा उस राजा से युद्ध करती है युद्ध के दौरान कूकर एक महिष रूपी राक्षस में परिवर्तित हो जाता है जो महिषासुर कहलाया. माँ महिषासुर का अंत कर देती हैं माँ के इस रूप को त्वरिता के नाम से भी जाना जाता है जो मराठी भाषा में तुलजा भी कहलाता है.
तुलजा भवानी मंदिर महत्व
तुलजा भवानी मंदिर महाराष्ट्र के प्राचीन वनक्षेत्र में यमुनांचल पर्वत पर स्थित है माना जाता है कि यहाँ पर स्थित माँ तुलजा भवानी की प्रतिमा स्वयंभू है. प्रतिमा के संदर्भ में एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है की यह मूर्ति मंदिर में स्थायी रूप से न होकर चलायमान रहती है. प्रत्येक वर्ष में यहाँ पर तीन बार माँ की मूर्ति की प्रदक्षिणापथ पर परिक्रमा करवाई जाती है.
tulja bawani temple
यहाँ पर चाँदी के छल्ले वाले स्तंभ हैं जिनके बारे में लोगों का विश्वास है कि यदि किसी भी व्यक्ति को कोई भी शारिरीक पीडा़ हो या शरीर के किसी अंग में दर्द हो तो वह व्यक्ति लगातार सात दिनों तक इस छल्ले का स्पर्श करे उसे अवश्य ही लाभ होगा.

मंदिर से एक जनश्रुति भी है जिसके अनुसार इस स्थान पर एक चमत्कारिक पत्थर भी विद्यमान है जो लोगों के सभी सवालों के जवाब देता है यदि आपके प्रश्न का उत्तर ‘हाँ’ है तो यह पत्थर स्वयं दाहिनी ओर मुड़ जाता है तथा जवाब नहीं में होने पर यह पत्थर बायीं दिशा में मुड़ जाता है. इस चमत्कारी पत्थर को चिंतामणि के नाम से जाना जाता है.

शालीग्राम पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा आठ हाथ वाली हैं, जो सिंह पर विराजमान हैं. देवी ने एक हाथ से उन्होंने दैत्य को पकड़े हुए हैं व दूसरे हाथ से दैत्य पर त्रिशूल से वार कर रही हैं  माता के आठों हाथों में गदा, त्रिशूल, चक्र, धनुष आदि शस्त्र सुसज्जित हैं प्रतिमा के समीप मार्कंडेय ऋषि की मूर्ति स्थापित है. मार्कंडेय पुराण के दुर्गा सप्तशती में माँ के इस रूप का वर्णन मिलता है.

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  1. बहुत बहुत धन्यवाद सत्संग लाइव टीम का, जो नवरात्र के दिनों में मुझे दिल्ली में बैठे बैठे महाराष्ट्र में माँ तुलजा भवानी के दर्शन करवाए. साथ ही सारी सम्बंधित जानकारी भी दी. यदि आवागमन सम्बन्धी जानकारी दी जाये, तो भक्तों को आसानी रहेगी.

    II आई तुलजा समर्थ II